राजस्थान में 1 मार्च 2036 तक कुल आबादी 9.056 करोड़ तक पहुंचने का अनुमान है। इसमें 65 फीसदी यानी करीब 5.8 करोड़ 40 वर्ष तक के युवागण होंगे। यही राजनीति, अर्थव्यवस्था और सामाजिक संरचना के तंत्र संभालने में बड़े हिस्सेदार बनेंगे। युवा आबादी के लिहाज से राजस्थान का देश में सातवां स्थान हाेगा। जबकि, राष्ट्रीय स्तर पर कुल आबादी में 40 साल तक के युवा लगभग 60 फीसदी रहेेंगे। इस लिहाज से राजस्थान में युवा आबादी ज्यादा हाेगी। प्रदेश की युवा आबादी में महिला-पुरुष का अनुपात लगभग बराबर रहने की संभावना है। हालांकि, आने वाले वर्षों में राज्य का युवा आधारभूत ढांचा स्थिर या वृद्ध होती जनसंख्या की ओर बढ़ेगा। नीति आयोग की तकनीकी समुह की रिपोर्ट के मुताबिक, इस साल 31 मार्च तक प्रदेश की कुल जनसंख्या 8.36 करोड़ तक पहुंचने काे अनुमान है, जाे 1 मार्च 2036 तक लगभग 70 लाख बढ़कर 9 करोड़ के पार हाे जाएगी। समस्याएं भी; सुरक्षा कमजोर होगी
युवा आबादी के बावजूद औद्योगिक विस्तार व निवेश योजनाएं अपेक्षित गति नहीं पकड़ पा रही। स्कूल, महाविद्यालय, तकनीकी प्रशिक्षण केंद्रों की स्थिति अभी तक मांग के अनुरूप नहीं सुधरी है। जोधपुर, श्रीगंगानगर जैसे जिलों में छात्र-शिक्षक अनुपात का अंतर बढ़ा है। महिला सुरक्षा, स्वास्थ्य व रोजगार के क्षेत्रों में अभियानों की निरंतरता नहीं है। आबादी बढ़ने से सामाजिक सुरक्षा नेटवर्क कमजोर पड़ सकता है। युवा आबादी के लिहाज से राजस्थान का देश में 7वां स्थान हाेगा भास्कर एक्सपर्ट- महेश शर्मा, राष्ट्रीय कोषाध्यक्ष, वीआईसीसीआई युवा आबादी अधिक होना वरदान है। प्रदेश में उद्योग के लिए अच्छी-खासी वर्कफोर्स तैयार हाे जाएगी। लेकिन, सरकार काे इसके लिए रोडमैप तैयार कर कौशल विकास, उद्यमिता, डिजिटल पहुंच और वित्तीय साक्षर बनाना हाेगा। शिक्षा में सुधार के लिए फंड आवंटन बढ़ाने की भी जरूरत है। महिला रोजगार दर बढ़ाने के लिए महिला उन्मुख स्टार्टअप को प्रोत्साहन की जरूरत है। कौशल प्रमाणन, रोजगार मेले व कॅरियर काउंसिलिंग के लिए युवा सुविधा केन्द्र तैयार करने की जरूरत हाेगी।अगर यह नहीं किया गया ताे युवा शक्ति का पूरा उपयोग नहीं हाे पाएगा।


