अजमेर के कायड़ में बसा जायरीनों का गांव:देश भर से पहुंच रहे अकीदतमंद, रहने, खाने के साथ पुख्ता सुरक्षा इंतजाम

ख्वाजा गरीब नवाज की दरगाह के सालाना 813वें उर्स में शामिल होने के लिए देशभर से अकीदतमंद अजमेर पहुंचे है। इनको ठहराने के लिए कायड़ विश्राम स्थली पर व्यापक इंतजाम किए गए है। कायड़ का नजारा एक गांव जैसा नजर आ रहा है। यहां सुरक्षा के लिए पुलिस का जाब्ता व अधिकारी लगाए गए है। साथ ही वाहनों के लिए पार्किंग स्थल भी बनाए गए है। दरगाह उर्स की शुरूआत हो गई। इसके साथ ही जायरीनों की आवक भी शुरू हुई। जायरीन के लिए बनी पक्की डोरमेट्री, वुजू खाना, गुस्ल खाना और शौचालयों के साथ बडे़ शामियाना तैयार किए गए है। यहां लगी दुकानों पर जायरीन जमकर खरीदारी कर रहे हैं। कायड़ विश्राम स्थली में देश के विभिन्न राज्यों के अलग-अलग भाषा बोलियों वाले लोग एक जगह जमा नजर आए। यह ऐसा स्थल है, जहां देश के विभिन्‍न राज्यों के पहनावे वाले लोग, अलग-अलग भाषा बोलने वाले लोग और अलग-अलग तरह के खानपान वाले लोग एक साथ जमा थे। दक्षिण भारतीय राज्यों के जायरीन सफेद लूंगी और कमीज में नजर रहे थे। बिहार, यूपी, बंगाल के लोग धोती कुर्ता में नजर रहे थे। गुजरात और महाराष्ट्र के लोग भी अपनी विशेष वेशभूषा में नजर आए। कश्मीर से आए लोग सलवार कुर्ता में अपनी तहजीब की नुमाइंदगी करते दिखाई दिए। इधर, राजस्थान के विभिन्न देहातों से आए लोग सफेद पगड़ी सिर पर बांधे, धोती कुर्ते में नजर आए। महिलाओं का भी अलग अंदाज था। बिहार यूपी के साथ ही बंगाल से आईं महिलाएं साडिय़ों में ही नजर रही हैं। मध्य प्रदेश, दिल्ली, कश्मीर गुजरात से आई महिलाएं पारंपरिक सलवार कमीज में नजर रही हैं। इन जायरीन की अलग-अलग बोलियां एक दूसरे के लिए रोचकता से कम नहीं, लेकिन सबका मकसद एक ही गरीब नवाज का खिराज अकीदत पेश करना है। पढें ये खबर भी… चांद दिखने के साथ दरगाह का उर्स शुरू:शादियाने बजाए गए, दरगाह दीवान की सदारत में हुई पहली महफिल इस्लामी कैलेंडर के रजब महीने का चांद बुधवार को नजर आ गया। इसके साथ ही ख्वाजा साहब के 813वें उर्स की शुरुआत रात से हो गई। चांद दिखाई देने और उर्स का ऐलान होते ही दरगाह में शादियाने बजाए गए। बड़े पीर साहब की पहाड़ी से तोप के गोले दागे गए। पूरी खबर पढ़ने के लिए करें क्लिक

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