अजमेर के जेएलएन अस्पताल के मुख्यमंत्री निशुल्क दवा योजना के काउंटर से जीवन रक्षक दवाइयां तक सप्लाई नहीं हो रही हैं। अस्पताल प्रशासन रंग रोगन व टाइल्स लगवाने पर लाखों रुपए खर्च कर रहा है। लेकिन मरीजों की जान बचाने के काम आने वाली दवाइयां नहीं है। यहां तक कि खून पतला करने के काम आने वाली दो रुपए की एस्प्रिन की गोली तक नहीं मिल रही है। मरीजों को पर्ची देकर बाहर से दवाइयां मंगवाई जा रही हैं। इंसुलिन इंजेक्शन और एस्प्रिन तक नहीं विडंबना तो ये है कि डायबिटीज के मरीजों की लाइफ लाइन माने जाने वाला इंसुलिन इंजेक्शन भी नहीं है। तीन महीने से डायबिटीज के मरीजों को सप्लाई जल्द आने का आश्वासन देकर टाला जा रहा है। दवाइयां नहीं आने के कारण मरीजों को एक काउंटर से दूसरे काउंटर पर भेजा जा रहा है। नियमों के तहत यदि कोई दवा नहीं मिल रही है तो एनएहिट यानी नॉट अवेलेबल किया जाना चाहिए। लेकिन जेएलएन में इसकी पालना नहीं हो रही है। एनएहिट होते ही जयपुर मुख्यालय को पता चल जाएगा कि कौन सी दवाइयां कहां पर नहीं है। जेएलएन में दवा को लेकर लंबी फौज लगी है। फिर भी दवाओं को लेकर कंट्रोल नहीं है। इन दवाओं की सबसे ज्यादा डिमांड… यही सप्लाई में नहीं खून पतला करने के काम आने वाली एस्प्रिन, हार्ट के मरीजों के सबसे ज्यादा टेबलेट 75 एमजी काम आती है। टेबलेट एन- एसिटाइलसिस्टीन 600-टेब सिल्डोसेन, डेंटेसेट्रोइड्स ये कफ कम करने के काम आती है। सिलिडोसिन प्लस डयूटरोसोडिन ये यूरिन के मरीजों के लिए है। सांस के मरीजों के लिए बुडोसेन्ड इसी दवा से नेबुलाइज किया जाता है।


