अजमेर दरगाह में मनाया बंसत, मांगी दुआ:खुसरो और नियाज के लिखे गीतों को गाया, सरसों के फूलों से सजे गुलदस्ते किए पेश

अजमेर की ख्वाजा गरीब नवाज की दरगाह शरीफ में सिलसिला-ए-चिश्तीयां की खानकाहो में मकबूल ‘बसंत‘ को मर्सरतों-अकीदत के साथ मनाया गया। दरगाह में बसंत पेश कर दुआ की गई। इस मौके पर दरगाह शरीफ के शाही कव्वालों ने हजरत अमीर खुसरो और हजरत नियाज बे नियाज के लिखे बंसत गीतों को रागे बसंत में पढें । दरगाह ख्वाजा साहब के निजाम गेट से शाही कव्वालों ने सरसों और गुलाब के खूबसूरत फूलों से सजे बसंत के गुलदस्तों को खानकाही अंदाज में मजार शरीफ पर पेश किया। दरगाह कमेटी सदस्य बंसंत में कार्यक्रम में व्यवस्था बनाए हुए थे। दरगाह दीवान सैयद जैनुअल आबेदीन अली के पुत्र सैयद नसरुद्दीन के साथ ही कई खुद्दाम हजरात और आशिकाने ख्वाजा ने भी बसंत में शिरकत की। इसलिए मनाते हैं बसंत
चिश्तिया खानकाहों में बसंत पेश करने का चलन हजरत अमीर खुसरो साहब से शुरू हुआ । जब, सबसे पहले हजरत अमीर खुसरो ने ही अपने पीरो मुर्शद हजरत निजामुद्दीन औलिया की शान में बसंत को लिखा और पेश किया था। इसके बाद से ही बसंत चिश्तिया खानकाहों और उनसे जुड़े शाही कव्वालों द्वारा हर साल एक त्यौहार के तौर पर मनाई जाने लगी। इस दिन घरों में बसंत की खुशी में पीले कपड़े पहने जाते है और खास तौर से पीले चावल बनाए जाते हैं। बसंत के कलाम हजरत अमीर खुसरो और हजरत नियाज बे नियाज के लिखे हुए है । यही कलाम शाही कव्वाल पेश करते हैं। (फोटो-वीडियो-नजीर कादरी) ……….. पढें ये खबर भी… अजमेर के पीसांगन में बर्फ जमी:2 डिग्री तक गिरा तापमान, ठिठुरन बढ़ी, कल बारिश की संभावना अजमेर में सीजन की तीसरी मावठ के असर से तेज ठिठुरन के साथ गलन बनी हुई है। रविवार सुबह साढ़े पांच बजे तापमान 7.2 डिग्री दर्ज किया गया है। बीते 24 घंटे में तापमान 4.9 डिग्री दर्ज किया गया। जो कल से भी 2 डिग्री कम रहा। सुबह से धूप खिली है, लेकिन गलन बरकरार है। पूरी खबर पढें

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