अजमेर होटल अग्निकांड-चौथे फ्लोर से कूदा पति:मासूम को नीचे फेंकने वाली मां बोली-किसी ने हमारी मदद नहीं की; हमें बचाया जा सकता था

‘मेरे पति की यहां किसी ने कोई मदद नहीं की, आग लगते ही होटल स्टाफ भाग गया, हम चौथी मंजिल से मदद के लिए चिल्लाते रहे, कोई आगे नहीं आया। अब मेरे तीनों बच्चे यतीम(अनाथ) हो गए, कौन हमें देखेगा?’ ये दर्द है अजमेर के होटल नाज में हुए अग्निकांड में अपने पति को खोने वाली नई दिल्ली की रेहाना का। रेहाना का पति चौथी मंजिल की खिड़की के छज्जे के सहारे अपने परिवार को बचाने की कोशिश कर रहा था। तभी बैलेंस बिगड़ा और नीचे गिरने से उनकी दर्दनाक मौत हो गई। मदद नहीं मिली तो मां को मजबूरन अपने बच्चे को खिड़की से नीचे फेंकना पड़ा, जिससे वो गंभीर घायल हो गया। गुरुवार सुबह हुए इस अग्निकांड में गुजरात के दंपती और उनके डेढ़ साल के बेटे समेत 4 लोगों की मौत हो गई, जबकि 4 जायरीन बुरी तरह से घायल हो गए। भास्कर टीम ने आगजनी की इस दर्दनाक घटना में अपनों को खोने वाले पीड़ितों का दर्द जाना। पढ़िए पूरी रिपोर्ट… प्रत्यक्षदर्शी बोले- मना किया, मां ने बचाने के चक्कर में खिड़की से नीचे फेंका
जिस होटल नाज में आग लगने की यह घटना हुई, यह अजमेर दरगाह से महज 500 मीटर दूर पीछे की तरफ डिग्गी बाजार की तंग गलियों में स्थित है। एक स्थानीय निवासी मांगीलाल कालोसिया ने बताया कि सुबह करीब 7.15 बजे के आस-पास की घटना है। अचानक धमाके की आवाज सुनकर हम घर से बाहर निकले। देखा तो होटल नाज में आग लग रही थी। पता चला कि एसी फटा है, तुरंत आस पास के लोगों को बुलाया। होटल के कांच तोड़कर गेट खोलने का प्रयास किया। फायर ब्रिगेड आती इससे पहले होटल में ठहरी एक महिला ने ऊपर से अपने बच्चे को नीचे फेंक दिया। इसके बाद एक आदमी भी नीचे कूद गया, उसका सिर फट गया। घटना के 30 मिनट में फायर ब्रिगेड पहुंची0 इसके बाद रेस्क्यू ऑपरेशन शुरू हुआ। तब तक गुजरात के दंपती और उनके डेढ़ साल के बेटे समेत 4 लोगों की मौत हो गई, जबकि 4 लोग झुलस गए, इनकी हालत गंभीर है। बच्चे को नीचे फेंकने वाली मां बोली- कोई मदद करता तो पति की जान बच जाती
होटल से रेस्क्यू किए गए लोगों को JLN हॉस्पिटल ले जाया गया था। यहां हमारी मुलाकात दिल्ली निवासी रेहाना से हुई। रेहाना अपने पति मोहम्मद जाहिद और सबसे छोटे बेटे इब्राहिम के साथ इस होटल में ठहरी थी। आग के दौरान परिवार होटल की चौथी मंजिल पर फंसा था। अपने बच्चे को बचाने के लिए रेहाना को उसे चौथी मंजिल से नीचे फेंकने को मजबूर होना पड़ा। खिड़की से मदद के लिए पुकारते पति की अचानक नीचे गिरने से मौत हो गई। इस मंजर को याद करते हुए रेहाना रोने लगीं। उन्होंने बताया कि एक दिन पहले बुधवार रात 2 बजे वो पति मोहम्मद जाहिद और सबसे छोटे बेटे इब्राहिम के साथ अजमेर आई थी। शुक्रवार दिल्ली वापसी की ट्रेन थी। होटल में चौथे फ्लोर पर अपने कमरे में सो रहे थे। सुबह करीब साढ़े सात बजे हमने कमरे की विंडो से बाहर झांककर देखा तो नीचे चीखने-चिल्लाने की आवाजें आ रही थी। हमें अनहोनी का अंदाजा हो गया था। भागने के लिए दौड़े लेकिन कमरे का गेट नहीं खुला। इसके बाद मैंने और पति ने जोर लगाकर गेट खोला तो बाहर से कमरे में धुआं ही धुआं आ गया। इसके बाद हमने जोर-जोर से मदद के लिए आवाज लगाई। बचाओ-बचाओ, चिल्लाए। पति ने खिड़की का कांच तोड़ा
खिड़की का कांच तोड़कर बाहर खड़ी भीड़ से मदद के लिए चिल्लाए। धुआं होने के कारण दम घुट रहा था। होटल वालों को भी खूब पुकारा लेकिन किसी ने कोई रिस्पोंस नहीं दिया। हम जैसे-तैसे खिड़की के सहारे बालकनी में आए। वहां खड़े होने के लिए ज्यादा जगह नहीं थी तो मेरे पति जाहिद तार के सहारे बचने की कोशिश कर रहे थे। सामने की बिल्डिंग में काम चल रहा था। कोई लकड़ी या सीढ़ी लगा देता तो मेरे पति की जान बच जाती। लेकिन कोई मदद को आगे नहीं आया। अचानक उनका बैलेंस बिगड़ गया और वो चौथी मंजिल से नीचे गिर गए। उनकी दर्दनाक मौत हो गई। इससे पहले हमने नीचे गद्दा और चद्दर भी फेंका था। हमें बचाया जा सकता था। होटल में कोई एग्जिट गेट नहीं था। हमारे कमरे में लैंडलाइन फोन भी तो था, कोई कॉल भी कर देता तो हम बच जाते। होटल में एक आदमी बचकर बाहर निकल रहा था, हमने उसे कहा कि हमारे बच्चे को साथ ले जाए, पर उसने भी हमारी कोई मदद नहीं की। गरीबों को खाना खिलाने आया था पति
रेहाना ने बताया कि उनके पति जाहिद दिल्ली में यूनियन बैंक में कार लोन से जुड़ा काम देखते थे। उनके मां-बाप का पहले ही इंतकाल हो गया था। जाहिद के अलावा हमारा कोई भी नहीं है। अब मेरे तीन बच्चे एक दस साल का बेटा और 6 साल की बेटी के अलावा डेढ़ साल का सबसे छोटा बेटा है। ये तीनों यतीम हो गए हैं। इब्राहिम की क्या हालत है, मुझे कुछ पता नहीं है। जाहिद गरीबों को खाना खिलाना चाहते थे, हम यहां नहीं आते तो शायद आज वो बच जाते।’ आगजनी की इस घटना में रेहाना के पति मोहम्मद जाहिद की चौथी मंजिल से गिरने से मौत हो गई थी। वहीं डेढ़ साल के बेटे इब्राहिम के भी ऊपर से नीचे गिरने से काफी चोट आई है। फिलहाल इब्राहिम की हालत गंभीर है और उसका आईसीयू में इलाज चल रहा है। रेहाना ने होटल नाज के मालिक और स्टाफ के खिलाफ मामला दर्ज कराया है। एक ही परिवार के तीन लोग की मौत
इस अग्निकांड में गुजरात के अमरेली जिले के लाठी गांव के दंपती और उनके डेढ़ साल के बेटे की भी मौत हुई है। इसी लाठी गांव से आए कई जायरीनों ने बताया कि अल्फेज नूरानी अपनी पत्नी शबनम नूरानी और बेटे अरमान नूरानी उनके साथ ही आए थे। लेकिन वो होटल नाज में रुके थे और हम कहीं और। उनके होटल में हुए अग्निकांड की सूचना मिलने पर वे अस्पताल पहुंचे तो उनकी मौत की खबर मिली। नींद में ही दम घुटने से हुई परिवार की मौत
भास्कर पड़ताल में हमें पता चला कि नाज होटल के जिस कमरे में अल्फेज नूरानी का परिवार ठहरा था, वहां वेंटिलेशन नहीं था। उनका कमरा सबसे लास्ट में था। ऐसे में जब धुआं फैला तो वो नींद में थे। धुंए और गैस से उनका दम घुट गया और उन्होंने कमरे में ही दम तोड़ दिया। हॉस्पिटल में ही मौजूद सैयद रेहान चिश्ती ने बताया कि जब होटल में आग लगी तो वहां का स्टाफ नींद में था। किसी ने वहां ठहरे मेहमानों को अलर्ट नहीं किया। यहां तक कि आग बुझाने का प्रयास भी नहीं किया। उल्टा वो मौके से भाग गए। ये उनकी बहुत बड़ी लापरवाही थी। लोगों को वहां मरने के लिए छोड़ दिया गया। तीन घंटे बाद चेकआउट करना था
अल्फाज अपने गांव में चश्मे की दुकान चलाते थे। अल्फाज और शबनम रविवार को अपने बेटे के साथ लाठी से अजमेर गए थे। और उन्हें गुरुवार की सुबह 10 बजे होटल से चेकआउट करके लाठी के लिए निकलना था। इससे पहले ही होटल में आग लग गई और उनकी दम घुटने से मौत हो गई। संकरी गलियों में होटल, फायर बुझाने वाले कर्मी भी घायल
होटल संकरी गलियों में है। वहां लगी आग को बुझाने के दौरान फायर डिपार्टमेंट के कई कर्मचारी घायल हो गए। उन्हें भी यहीं JLN हॉस्पिटल में ही एडमिट किया गया था। इन्हीं में से एक जयपुर की रहने वाली विशाखा शर्मा ने बताया कि वो अपनी साथी कृष्णा मीणा के साथ होटल में आग बुझाने के लिए सबसे पहले पहुंचे थे। वहां 4-5 लोगों का रेस्क्यू किया था। अंदर हालत काफी खराब हो गए थे। धुआं ही धुआं होने से सभी का दम घुट रहा था। इस दौरान कई साथी भी घायल हो गए थे। नगर निगम अजमेर के फायर ऑफिसर जगदीश चंद्र फुलवारी ने हमें बताया कि इस हादसे में जो भी मौतें हुई हैं वो दम घुटने और ऊपर से गिरने से ही हुई है। कोई भी जलकर नहीं मरा है। हमने आग लगने के महज 35 मिनट बाद ही आग पर काबू पा लिया था और रेस्क्यू को अंजाम दे दिया था। आग क्यों लगी, इसका खुलासा तो जांच के बाद ही हो सकेगा। —— यह भी पढ़ेंः अजमेर के होटल में आग, 4 लोगों की मौत:मरने वाले 3 एक ही परिवार के; मां ने मासूम को खिड़की से फेंका, पूरी बिल्डिंग जली अजमेर के होटल में लगी आग में गुजरात के दंपती और उनके डेढ़ साल के बेटे समेत 4 लोगों की मौत हो गई, जबकि 4 लोग झुलसे हैं। इनकी हालत गंभीर बताई जा रही है। महज 30 मिनट में आग ने पूरे होटल को चपेट में ले लिया था…(CLICK कर पढ़ें)

FacebookMastodonEmail

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *