अजवाइन-मेथी, सुआ-सौंफ की खेती पर होगा शोध, किसानों की कमाई बढ़ाएंगे

आदिवासी बहुल इस जिले में बीज मसालों के खेती को बढ़ावा दिया जाएगा। इससे ग्रामीणों की आय में बढ़ोतरी होगी। इसके लिए महाराणा प्रताप कृषि एवं प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय (एमपीयूएटी) और आईसीएआर का राष्ट्रीय बीजीय मसाला अनुसंधान केंद्र, अजमेर काम करेगा। केंद्र का दौरा करने के बाद एमपीयूएटी के वीसी डॉ. अजीत कुमार कर्नाटक ने बताया कि जिले में अजवाइन, मेथी, सुआ और सौंफ की खेती पर रिसर्च होगी। दोनों संस्थान मिलकर इन फसलों में खरपतवार, रोग निदान, नए बीज, नई तकनीक आदि पर काम करेंगे। जिले में अजवाइन, सुआ की खेती मावली ब्लॉक के महज 6 हजार हेक्टेयर में होती है। मेथी की खेती शहर से सटे गांवों में भी होती है, जबकि कोटड़ा, आबू रोड, स्वरूपगंज एरिया में सौंफ की बुवाई होती है। नई तकनीक आने से मसालों की खेती को बढ़ावा मिलेगा। दोनों संस्थानों के बीच एमओयू के प्रावधानों को और मजबूत करने के लिए एनआरसीएसएस के निदेशक डॉ. विनय भारद्वाज के साथ विस्तृत चर्चा की। पर्यवेक्षक बनेंगे स्नातकोत्तर और पीएचडी के छात्र, तकनीक का प्रशिक्षण देंगे अनुबंध के अनुसार एमपीयूएटी आदिवासी बहुल सेवा क्षेत्र में बीज मसालों की खेती को बढ़ावा देने के लिए कृषि विज्ञान केंद्रों के अपने प्रौद्योगिकी हस्तांतरण नेटवर्क का सहयोग देगा। कुलपति ने बीज मसालों के आनुवंशिक संसाधन प्रबंधन, फसल सुधार, उत्पादन और संरक्षण प्रौद्योगिकियों पर अनुसंधान तथा प्रसंस्करण और मूल्य संवर्धन पर प्रौद्योगिकी संवर्द्धन में तकनीकी सहयोग का आश्वासन दिया। ताकि इन फसलों से किसानों की आय में वृद्धि हो सके। डॉ. भारद्वाज ने पर्यवेक्षक के रूप में स्नातकोत्तर और पीएचडी छात्रों की सेवाएं देने, एनएससीएसएस में शोध को बढ़ाने की स्थिति में उन्हें प्रयोग की सुविधा देने का आश्वासन दिया। जिले के झाड़ोल क्षेत्र में अदरक, हल्दी की खेती का काफी प्रचलन है। यहां की हल्दी की इतनी डिमांड है कि जयपुर से लेकर अहमदाबाद तक सप्लाई की जाती है। इसके अलावा यहां रतालू की भी खेती की जाती है। इसकी भी स्थानीय बाजार में काफी डिमांड है। वजह ये है कि इस आदिवासी क्षेत्र में आज भी ऑर्गेनिक रूप से खेती की जाती है। इसके अलावा झाड़ोल क्षेत्र में मिर्च भी कई विशेषताओं वाली है, जो मारवाड़ किस्म के समानांतर मानी जाती है। कोटड़ा के कुछ हिस्सों में मसाला फसलों की बुवाई होती है।

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