रायपुर। राज्य में 4 नवंबर से एसआईआर प्रक्रिया शुरू हुई और उसी दिन से ज्यादातर प्रायमरी स्कूलों में पढ़ाई ठप हो गई। प्रधान पाठक को छोड़कर सभी शिक्षकों की ड्यूटी लगा दी गई है। 12 दिसंबर से मिडिल और हाई स्कूल के दो-दो, तीन-तीन शिक्षकों को अभिहित अधिकारी का जिम्मा सौंप दिया। इससे मिडिल और हाई स्कूल की पढ़ाई का सिस्टम गड़बड़ाया। ये काम पूरा नहीं हुआ था कि बचे हुए शिक्षकों को नई शिक्षा नीति के तहत ट्रेनिंग में भेज दिया। हर ब्लॉक में 150 शिक्षकों को एक-एक हफ्ते की ट्रेनिंग दी जा रही है। यही नहीं हायर सेकेंडरी स्कूल के बचे हुए लेक्चरों में हर किसी की 5 से 9 जनवरी तक ओपन स्कूल परीक्षा की ट्रेनिंग में लगा दिया। उसके बाद भी जो बचे उन्हें 7 से 12 जनवरी को बोर्ड का ब्लू प्रिंट के प्रशिक्षण के लिए बुला लिया। कोई पूरा हुआ नहीं और 19 जनवरी से प्री-बोर्ड परीक्षा फिर 20 फरवरी से मुख्य परीक्षाएं शुरू हो जाएंगी। टीचरों पर एक ओर एसआईआर की जिम्मेदारी सौंपी गई है दूसरी ओर अलग-अलग ट्रेनिंग प्रोग्राम चलाए जा रहे हैं। इससे पढ़ाई की स्थिति क्या है? ये पता लगाने भास्कर ने पड़ताल की। खुलासा हुआ कि प्रायमरी स्कूल जिससे बच्चों की पढ़ाई का आधार तैयार होता है उसमें सबसे बुरी स्थिति है। आया की निगरानी में परीक्षा स्वामी आत्मानंद अंगेजी स्कूल शहीद स्मारक। दोपहर 12.45 बजे। क्लास-3। बच्चे छमाही परीक्षाएं दे रहे हैं। सामने कुर्सी पर आया मदर बैठी हैं, उन्हीं की निगरानी में परीक्षा हो रही है क्योंकि प्रायमरी के 7 में छह टीचर एसआईआर ड्यूटी में हैं। एक मेडिकल लीव पर हैं। यहां कम से कम आया मदर परीक्षा की निगरानी कर रही हैं, राजधानी के संजय नगर, लाखेनगर, बीरगांव में एकाध परीक्षा हॉल में टीचर है। बाकी कमरों में कोई देखने वाला नहीं है। स्कूलों में शिक्षक नहीं और शिक्षा विभाग का शेड्यूल एसआईआर के साथ ये करवा रहे


