अधूरी तैयारियों के साथ नुमाइश शुभारंभ:अलीगढ़ के 145वें महोत्सव का प्रभारी मंत्री ने गुब्बारे और कबूतर उड़ाकर किया शुभारंभ, अव्यवस्थाएं बनी रहीं चर्चाओं का विषय

अलीगढ़ की राजकीय औद्योगिक एवं कृषि प्रदर्शनी (नुमाइश) का अधूरी तैयारियों के साथ भव्य अंदाज में उद्घाटन हुआ। प्रदेश के गन्ना विकास, चीनी मिलें एवं जनपद प्रभारी मंत्री लक्ष्मी नारायण चौधरी ने मित्तल द्वार पर फीता काटकर, गुब्बारे और शांति के प्रतीक कबूतर उड़ाकर नुमाइश का शुभारंभ किया। मगर अंदर हालात कुछ और ही नजर आए। उद्घाटन के तुरंत बाद मंत्री ने औद्योगिक, कृषि और विकास मंडपों का निरीक्षण किया, लेकिन आम दर्शकों के लिए अधिकांश दुकानें अभी भी बंद रहीं। कई दुकानदार दिनभर दुकानें लगाते दिखे। नतीजा यह रहा कि पहले दिन दर्शकों को घूमने के लिए पूरा नुमाइश परिसर तक तैयार नहीं मिल सका। सर्कस, झूले और फिश टनल भी नहीं हुए शुरू नुमाइश के पहले दिन जिन आकर्षणों को सबसे ज्यादा भीड़ खींचनी थी, वे ही अधूरे रहे। सर्कस, फिश टनल और झूले पूरी तरह तैयार नहीं हो सके और न ही इन्हें शुरू किया जा सका। इससे दूर-दराज से पहुंचे दर्शकों को निराश होकर लौटना पड़ा। कृष्णांजलि में रंगारंग कार्यक्रम, बाहर अव्यवस्था कृष्णांजलि नाट्यशाला में मां सरस्वती की प्रतिमा के समक्ष दीप प्रज्ज्वलन के साथ उद्घाटन समारोह हुआ। संगीता डांस एकेडमी की छात्राओं ने गणेश वंदना प्रस्तुत की। कथक-फोक नृत्य और मयूर नृत्य की प्रस्तुतियों ने दर्शकों की तालियां बटोरीं। मंच पर संस्कृति की छटा बिखरी रही, लेकिन मंच के बाहर नुमाइश की अधूरी तैयारी चर्चा का विषय बनी रही। तकनीक से जुड़ चुकी है प्रदर्शनी प्रभारी मंत्री लक्ष्मी नारायण चौधरी ने अलीगढ़ को गंगा-जमुनी तहजीब का प्रतीक बताया। उन्होंने कहा कि प्रदर्शनी का स्वरूप ऊंटगाड़ी और बैलगाड़ी के दौर से निकलकर आज ड्रोन, रोबोट और आधुनिक तकनीक तक पहुंच गया है। एक माह चलेगी नुमाइश सांसद सतीश गौतम ने कहा कि अलीगढ़ महोत्सव लगभग एक माह तक चलेगा और इसके आयोजन के लिए जिला व पुलिस प्रशासन सराहना के पात्र हैं। वहीं सांसद हाथरस अनुप वाल्मीकि ने 147वीं प्रदर्शनी को निरंतर प्रगति का प्रतीक बताया। कार्यक्रमों की सूची भी अधूरी राजकीय औद्योगिक एवं कृषि प्रदर्शनी समिति द्वारा जारी कार्यक्रम सूची भी सवालों के घेरे में है। सूची में 57 कार्यक्रमों को केवल ‘सांस्कृतिक कार्यक्रम’ बताया गया है, लेकिन यह स्पष्ट नहीं किया गया कि ये कार्यक्रम किस तरह के होंगे और किन संस्थाओं द्वारा आयोजित किए जाएंगे। 129 कार्यक्रमों के नाम जरूर तय किए गए हैं, लेकिन पूरा कार्यक्रम कैलेंडर अब तक अंतिम रूप नहीं ले सका है।

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