शहर में मेट्रो के एलिवेटेड और अंडर ग्राउंड कॉरिडोर निर्माण का मामला हाई कोर्ट पहुंच गया। संस्था विकास मित्र दृष्टि-2050 ने बीच शहर में अंडर ग्राउंड ट्रैक निर्माण से हेरिटेज प्रभावित होने व भूजल संरचना खराब होने का सवाल उठाते हुए जनहित याचिका दायर की। संस्था का कहना है बीच शहर में निर्माण होने से 10 हजार घर प्रभावित होंगे। कॉर्पोरेशन ने पर्यावरण प्रभाव समिति व जिला योजना समिति से भी प्रोजेक्ट के संबंध में अनुमतियां नहीं लीं। वह टेंडर जारी कर सीधे काम कर रहा है। याचिका में मांग की गई कि हाई कोर्ट कॉर्पोरेशन को नियमों का पालन कर ट्रैक निर्माण के निर्देश दे।
याचिका संस्था के किशोर कोडवानी, शेखर गिरि आदि ने प्रस्तुत की। इसमें याचिकाकर्ता ने बताया शहर में मेट्रो प्रोजेक्ट 2012 से चल रहा है। इसके लिए सर्वे, डीपीआर बनाने का काम किया जा रहा। 2018 में इसके एयरपोर्ट से एयरपोर्ट तक 31 किमी का सर्कल रूट बनाने का काम शुरू हुआ। इसमें से मध्य शहर में करीब 8 किमी का ट्रैक अंडर ग्राउंड रहेगा। इसके निर्माण से शहर का बड़ा हिस्सा प्रभावित होगा। मेट्रो रेल कॉर्पोरेशन द्वारा निर्माण में कई तरह की अनियमितताएं की जा रहीं। सामान्य तौर पर प्रक्रिया में प्रस्ताव बनता है। इसके आधार पर जमीन अधिग्रहण किया जाता, साइट क्लीयर होने पर टेंडर जारी किए जाते। कॉर्पोरेशन ने टेंडर जारी कर दिए, जबकि अब तक साइट क्लीयर नहीं है। इसमें नियमों के अनुसार अनुमतियां, सर्वे आदि नहीं किए। 80 फीट नीचे निर्माण होने से पड़ेगा भूजल पर असर
याचिकाकर्ता कोडवानी का कहना है डीपीआर बनाते समय शहर की भौगोलिक व भूगर्भीय संरचना तक नहीं देखी गई। रास्ते में आ रहे तमाम हेरिटेज भवनों का सर्वे भी नहीं किया। टनल का निर्माण 80 फीट नीचे होगा। मध्य क्षेत्र भूजल के लिए बहाव क्षेत्र है। इससे यह प्रभावित होगा। वहीं हेरिटेज के आसपास निर्माण के नियम, मास्टर प्लान का पालन नहीं किया गया।


