अनीता आनंद बन सकती हैं कनाडा की PM:लिबरल पार्टी की बैठक में तय हो सकता है नाम, अभी ट्रांसपोर्ट मिनिस्ट्री की जिम्मेदारी

कनाडा में प्रधानमंत्री जस्टिन ट्रूडो के इस्तीफे के बाद बुधवार यानी आज सत्ताधारी लिबरल पार्टी के नेशनल कॉकस की बैठक होने वाली है। 6 जनवरी को इस्तीफा देते हुए ट्रूडो ने प्रधानमंत्री का चुनाव लड़ने से इनकार कर दिया था, ऐसे में आज होने वाली बैठक में पार्टी प्रधानमंत्री पद के लिए नए चेहरे का ऐलान कर सकती है। मीडिया रिपोर्ट्स में दावा किया जा रहा है कि भारतीय मूल की अनीता आनंद प्रधानमंत्री बनने की रेस में सबसे आगे हैं। अगर लिबरल पार्टी में उनके नाम पर सहमति बनती हैं तो वो कनाडा में प्रधानमंत्री पद पर पहुंचने वाली पहली अश्वेत और भारतीय मूल की महिला बन जाएंगी। अनीता आनंद कनाडा की लिबरल पार्टी की सीनियर मेंबर हैं। वह 2019 से कनाडाई संसद की सदस्य हैं। उन्होंने ट्रूडो सरकार में कई प्रमुख विभागों को संभाला है, जिसमें पब्लिक सर्विस और खरीद मंत्री, नेशनल डिफेंस मिनिस्टर और ट्रेजरी बोर्ड के अध्यक्ष की जिम्मेदारी शामिल है। वह 2024 से ट्रांसपोर्ट और इंटरनल ट्रेड मिनिस्टर हैं। बता दें कि 6 जनवरी को प्रधानमंत्री जस्टिन ट्रूडो ने यह कहते हुए पद से इस्तीफा दे दिया था कि वे अगले चुनाव के लिए अच्छा विकल्प नहीं हो सकते। हालांकि ट्रूडो प्रधानमंत्री के पद पर तब तक बने रहेंगे, जब तक उनका उत्तराधिकारी नहीं चुन लिया जाता। उनकी सरकार का कार्यकाल अक्टूबर तक था। वे नवंबर 2015 से देश के प्रधानमंत्री थे। अनीता आनंद को जानिए 58 साल की अनिता पेशे से वकील हैं। वे पहली बार 2019 में कैबिनेट मंत्री बनी थीं। उन्हें सार्वजनिक सेवाओं का खरीद मंत्री बनाया गया था। अनिता कनाडा का रक्षा मंत्रालय संभालने वाली दूसरी महिला हैं। इससे पहले 1990 में किम कैंबल ने ये जिम्मेदारी संभाली थी। अनिता के पिता तमिलनाडु जबकि मां पंजाब की रहने वाली थीं। हालांकि अनिता का जन्म कनाडा में ही हुआ था। अनीता आनंद ने क्वीन्स यूनिवर्सिटी से पॉलिटिकल साइंस में आर्ट्स ग्रेजुएशन, ऑक्सफोर्ड यूनिवर्सिटी से न्यायशास्त्र में आर्ट्स ग्रेजुएशन, डलहौजी यूनिवर्सिटी से लॉ ग्रेजुएशन और टोरंटो यूनिवर्सिटी से लॉ में मास्टर्स किया है। अनीता टोरंटो यूनिवर्सिटी की एसोसिएट डीन भी रह चुकी हैं। उन्होंने 1995 जॉन नोल्टन से शादी की, जो एक कनाडाई वकील और बिजनेस एग्जीक्यूटिव हैं। उनके 4 बच्चे हैं। ट्रूडो की पार्टी के पास बहुमत नहीं कनाडा की संसद हाउस ऑफ कॉमन्स में लिबरल पार्टी के 153 सांसद हैं। हाउस ऑफ कॉमन्स​​​​​​ में 338 सीटें है। इसमें बहुमत का आंकड़ा 170 है। पिछले साल ट्रूडो सरकार की सहयोगी पार्टी न्यू डेमोक्रेटिक पार्टी (NDP) ने अपने 25 सांसदों का समर्थन वापस ले लिया था। NDP खालिस्तान समर्थक कनाडाई सिख सांसद जगमीत सिंह की पार्टी है। गठबंधन टूटने की वजह से ट्रूडो सरकार अल्पमत में आ गई थी। हालांकि 1 अक्टूबर को हुए बहुमत परीक्षण में ट्रूडो की लिबरल पार्टी को एक दूसरी पार्टी का समर्थन मिल गया था। इस वजह से ट्रूडो ने फ्लोर टेस्ट पास कर लिया था। हालांकि न्यू डेमोक्रेटिक पार्टी (NDP) के नेता जगमीत सिंह ने PM ट्रूडो के खिलाफ फिर से अविश्वास प्रस्ताव लाने का फैसला किया है। अक्टूबर 2025 में कनाडा में संसदीय चुनाव होना है। ऐसे में लिबरल्स जल्द ही लीडर चुनेंगे। संभावना है कि पार्टी बिना चुनाव के ही किसी की नियुक्ति कर दे। अगर ऐसा होता है तो ये पहली बार होगा। ट्रूडो के खिलाफ क्यों है नाराजगी कनाडा के लोगों में लगातार बढ़ती मंहगाई के वजह से ट्रूडो के खिलाफ नाराजगी है। इसके अलावा पिछले कुछ समय से कनाडा में कट्टरपंथी ताकतों के पनपने, अप्रवासियों की बढ़ती संख्या और कोविड-19 के बाद बने हालातों के चलते ट्रूडो को राजनीतिक चुनौतियों का सामना करना पड़ रहा है। पिछले साल अक्टूबर में हुए इप्सोस के एक सर्वे में सिर्फ 28% कनाडाई लोगों का कहना था कि ट्रूडो को फिर से चुनाव लड़ना चाहिए। वहीं एंगस रीड इंस्टीट्यूट के मुताबिक ट्रूडो की अप्रूवल रेटिंग गिरकर 30% पर आ गई है। दूसरी तरफ उन्हें नापसंद करने वालों की संख्या 65% तक पहुंच गई है। देश में हुए कई सर्वे के मुताबिक अगर कनाडा में चुनाव होते हैं तो कंजर्वेटिव पार्टी को बहुमत मिल सकता है, क्योंकि जनता बढ़ती महंगाई से परेशान है। ——————————- यह खबर भी पढ़ें… आज का एक्सप्लेनर:कनाडा के पीएम जस्टिन ट्रूडो ने इस्तीफा क्यों दिया, अब कौन संभालेगा जिम्मेदारी; ट्रूडो की पॉलिटिक्स पर सबकुछ जो जानना जरूरी है कनाडा के प्रधानमंत्री जस्टिन ट्रूडो ने 6 जनवरी की शाम इस्तीफा दे दिया। कनाडाई मीडिया में पहले ही दावा कर दिया गया था कि ट्रूडो इस्तीफा दे सकते हैं। माना जा रहा है कि कनाडा के सबसे पॉपुलर नेता रहे जस्टिन ट्रूडो का पॉलिटिकल करियर अब खत्म होने की कगार पर है। यह खबर भी पढ़ें…

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