अनुभव अब अनिवार्य…:न्यायिक सेवा में घटेगा कंपिटिशन, 40% हो जाएंगे बाहर

सिविल जज नियुक्ति से लेकर हाई कोर्ट तक प्रमोशन के नियमों में बड़ा बदलाव होगा। दरअसल, सुप्रीम कोर्ट के चीफ जस्टिस बीआर गवई की अगुवाई वाली तीन जजों की बेंच ने जनहित याचिका पर अहम फैसला दिया है। अब सिविल जज नियुक्ति के लिए वकालत का तीन साल का अनुभव अनिवार्य कर दिया गया है। सुप्रीम कोर्ट के 63 पेज के फैसले में कई अहम बदलाव पर मुहर लगाया गया है। नए फैसले से अनुभवी लोग ही जज परीक्षा के लिए पात्र होंगे। 40 फीसदी लोग प्रतिस्पर्धा से बाहर हो जाएंगे। दरअसल, ज्यादातर स्टूडेंट्स लॉ की परीक्षा पास करने के बाद बार काउंसिल में रजिस्ट्रेशन नहीं करवाते। बता दें कि जबलपुर की एक लॉ स्टूडेंट की याचिका पर हाई कोर्ट के चीफ जस्टिस रमेश सिन्हा की डिवीजन बेंच ने स्टेट बार काउंसिल में पंजीयन नहीं होने पर पीएससी की सिविल जज परीक्षा के लिए आवेदन करने की अंतरिम छूट दी थी। यानी अब अगली भर्ती नए नियमों से होगी। जबलपुर में रहने वाली विनीता यादव ने हाई कोर्ट में याचिका लगाई थी। इसमें बताया कि उसने रानी दुर्गावती यूनिवर्सिटी, जबलपुर से विधि में स्नातक किया है और वर्तमान में सरकारी नौकरी में है। वह छत्तीसगढ़ लोक सेवा आयोग की सिविल जज (जूनियर डिवीजन) परीक्षा-2024 में शामिल होना चाहती है, लेकिन विज्ञापन में विधि स्नातक होने के साथ ही स्टेट बार काउंसिल में अधिवक्ता के तौर पर पंजीयन अनिवार्य किया गया है। पूर्णकालिक सरकारी नौकरी में होने के कारण वह बार काउंसिल ऑफ इंडिया के नियमों के अनुसार अधिवक्ता के तौर पर पंजीयन नहीं करा सकती। विभाग की अधिसूचना को चुनौती
याचिका में छत्तीसगढ़ के विधि एवं विधायी कार्य विभाग द्वारा 5 जुलाई 2024 को जारी अधिसूचना को चुनौती दी गई थी। इस अधिसूचना के अनुसार सिविल जज परीक्षा देने के लिए अभ्यर्थी के पास मान्यता प्राप्त विश्वविद्यालय से विधि की डिग्री होनी चाहिए, साथ ही उसे बार काउंसिल में अधिवक्ता के रूप में पंजीकृत होना चाहिए था। इसके अलावा छत्तीसगढ़ पीएससी द्वारा 23 दिसंबर 2024 को जारी विज्ञापन को गलत बताते हुए कहा गया है कि पुराने नियमों के तहत वह ऑनलाइन आवेदन भरने पात्र थी, लेकिन संशोधन के कारण अपात्र हो गई। 57 पदों के लिए होनी है परीक्षा
पीएससी की व्यवहार न्यायाधीश (कनिष्ठ श्रेणी) परीक्षा -2024 की परीक्षा 57 पदों के लिए होनी है। इसके लिए ऑनलाइन आवेदन मंगवाए गए थे। अंतिम तिथि 24 जनवरी थी। फिर इसे बढ़ाकर 23 फरवरी तक कर दिया गया था। एक्सपर्ट व्यू- अनुभवी जज मिलेंगे
शेट्‌टी कमीशन ने न्यायिक सेवा के लिए अनुभव अनिवार्य रखने की अनुशंसा की थी। बार कौंसिल ऑफ इंडिया भी लगातार इस पर जोर देता रहा है। मध्यप्रदेश ने हाल ही में 1994 के नियमों में संशोधन कर 3 साल का अनुभव जोड़ा है। जैसे, डॉक्टर और सीए का रजिस्ट्रेशन ​अनिवार्य है, वैसे ही यह संशोधन भी जरूरी था। सुप्रीम कोर्ट ने कहा है कि एक कुशल जज को किताबी ज्ञान के साथ समाज की परिस्थितियों का भी ज्ञान होना चाहिए। इस फैसले के दूरगामी परिणाम होंगे। बेहतर और अनुभवी जज मिलेंगे।
– सुनील ओटवानी, एक्जीक्यूटिव मेंबर, स्टेट बार कौंसिल क्या कहते हैं कानूनविद ^सुप्रीम कोर्ट का यह फैसला मील का पत्थर साबित होगा। बिना एक दिन की वकालत के अनुभव वाले न्यायाधीश का न्यायदान की प्रक्रिया में संतोषजनक परिणाम नहीं दिखता। न्यायालय ने न्यायदान की पहली नींव को परिपक्व बनाने यह ऐतिहासिक फैसला दिया है।
– रामनारायण व्यास, पूर्व अध्यक्ष अधिवक्ता संघ, पूर्व मेंबर स्टेट बार काउंसिल सुप्रीम कोर्ट की यह बहुत अच्छी व्यवस्था है। वकीलों के लिए पंजीयन के बाद तीन साल का अनुभव हमें अच्छा न्यायाधीश देगा। वे प्रैक्टिस के नॉलेज से हर समस्या से भिज्ञ भी रहेंगे। हर स्तर पर न्यायिक व्यवस्था दुरुस्त होगी।
– विवेक रंजन तिवारी, पूर्व अध्यक्ष छत्तीसगढ़ बार काउंसिल

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