अनूपपुर जिले के आदिवासी इलाकों में खून की कमी (एनीमिया) और सिकल सेल एक बड़ी समस्या बनी हुई है। स्वास्थ्य विभाग की कोशिशों के बावजूद दूरदराज के गांवों में मरीजों की संख्या कम नहीं हो रही है। इसी को देखते हुए मंगलवार को इंडियन रेड क्रॉस सोसाइटी ने लखनपुर पंचायत के बैगा बाहुल्य गांव पचड़ीपानी में एक बड़ा स्वास्थ्य शिविर लगाया। इस शिविर में पचड़ीपानी, लखनपुर, अगरियानार और अकुआ गांवों के 182 लोगों की जांच की गई। जांच में खुलासा: ग्रामीणों का हीमोग्लोबिन स्तर शहरी लोगों से काफी कम शिविर में आए मरीजों की जांच में डराने वाली बात सामने आई। डॉक्टर्स ने पाया कि यहां के लोगों का हीमोग्लोबिन स्तर शहरी क्षेत्र (जहां आमतौर पर 9 से 12 होता है) के मुकाबले काफी कम यानी 10 से भी नीचे है। इसे देखते हुए डॉक्टरों ने ग्रामीणों को खाने में हरी सब्जियां, दूध और मौसमी फल शामिल करने की सलाह दी। डॉक्टर्स की टीम ने सिकल सेल, कुपोषण, टीबी, मलेरिया, बीपी, शुगर और आंखों की भी बारीकी से जांच की। स्कूल के बच्चों का भी चेकअप किया गया और उन्हें सेहतमंद रहने के तरीके बताए गए। पूर्व सीएमएचओ बोले- स्वास्थ्य के लिए चिंता का विषय रेड क्रॉस सोसाइटी के चेयरमैन और पूर्व सीएमएचओ डॉ. आर.पी. सोनी ने बताया कि शिविर में बड़ी संख्या में ग्रामीण इलाज के लिए पहुंचे। उन्होंने हीमोग्लोबिन की इस कमी को सेहत के लिए बड़ा खतरा बताया और कहा कि स्वास्थ्य विभाग को ऐसे शिविर लगातार लगाने चाहिए। मरीजों को जांच के बाद मुफ्त दवाइयां भी बांटी गईं। शिविर में सरपंच, उप-सरपंच और शिक्षकों ने ग्रामीणों को इकट्ठा करने में मदद की। खास बात यह रही कि अकुआ गांव के बैगा आदिवासियों ने कर्मा और पारंपरिक नृत्य के साथ अतिथियों का स्वागत किया।


