बालाघाट शहर के 127 साल पुराने मां अन्नपूर्णा मंदिर में 50 वर्षों से प्रज्ज्वलित मन्नत ज्याेत का अगहन मास के समापन पर 4 दिसंबर को विसर्जन किया जाएगा। इस साल लगभग 114 मन्नत कलश स्थापित किए गए थे, जिनकी पूरे एक माह तक विशेष पूजा-अर्चना की गई। अगहन मास पर होगी परंपरागत पूजा यह परंपरा अगहन मास की एकम से पूर्णिमा तक, पूरे एक माह तक चलती है। इस दौरान सिद्ध पीठ अन्नपूर्णा मंदिर में प्रज्ज्वलित मन्नत ज्योति कलशों के साथ माता अन्नपूर्णा की विशेष पूजा-अर्चना होती है। विशेष रूप से महिलाएं व्रत रखकर अपने सुहाग और परिवार की संपन्नता की मन्नत मांगती हैं। मान्यता- कोई भक्त खाली हाथ नहीं लौटता मंदिर की मान्यता है कि इस सिद्ध पीठ से कोई भक्त खाली हाथ नहीं लौटता। साथ ही यहां के अक्षत को घर ले जाकर अन्न की कोठी में रखने से घर में संपन्नता बनी रहती है। समापन समारोह में लगेंगे छप्पन भोग मंदिर के सचिव सुशील वर्मा ने बताया कि 4 दिसंबर को प्रातः 10 बजे हवन-पूजन और माता रानी को छप्पन भोग अर्पित किया जाएगा। इसके बाद मन्नत कलशों का विसर्जन किया जाएगा और मां अन्नपूर्णा का महाप्रसाद भक्तों में वितरित किया जाएगा। मंदिर समिति के अध्यक्ष पंकज अग्रवाल, सचिव सुशील वर्मा, उपाध्यक्ष ओम सोनी, हरिओम अग्रवाल, संरक्षक आलोक नेमा, कोषाध्यक्ष संदीप नेमा और अन्य पदाधिकारी भक्तजनों से अपील कर चुके हैं कि माता रानी के उत्सव के समापन अवसर पर अधिक से अधिक संख्या में उपस्थित होकर आशीर्वाद प्राप्त करें। यह उत्सव मंदिर की पारंपरिक आस्था और भक्ति को जीवित रखने का अवसर है, जिसमें हर साल बड़ी संख्या में श्रद्धालु शामिल होते हैं। देखें तस्वीरें…


