अपर्णा दीदी बोलीं-राजयोग मेडिटेशन जीवन में शांति लाने का माध्यम:विश्व ध्यान दिवस पर राजयोग मेडिटेशन का महत्व बताया

विश्व ध्यान दिवस के अवसर पर प्रजापिता ब्रह्माकुमारी ईश्वरीय विश्वविद्यालय शाखा टोंक के राजयोग भवन में रविवार को ‘विश्व एकता व विश्वास के लिए ध्यान’ विषय पर विशेष कार्यक्रम का आयोजन किया गया। कार्यक्रम में राजयोग मेडिटेशन के माध्यम से विश्व में सुख, शांति, प्रेम, पवित्रता और खुशी का संदेश प्रसारित किया गया। इस अवसर पर ओम की दिव्य ध्वनि द्वारा स्वयं एवं आसपास के वातावरण को सकारात्मक ऊर्जा से भरने का अभ्यास कराया गया। कार्यक्रम में स्थानीय सेवा केंद्र प्रभारी ब्रह्माकुमारी अपर्णा दीदी ने कहा कि विश्व ध्यान दिवस मानवता को आंतरिक शांति और संतुलन की ओर ले जाने की एक महत्वपूर्ण पहल है। ध्यान केवल व्यक्तिगत साधना नहीं, बल्कि समाज और संपूर्ण विश्व में शांति, सद्भाव और करुणा का संचार करने का सशक्त माध्यम है। उन्होंने कहा कि जब एक व्यक्ति शांत होता है, तो उसका सकारात्मक प्रभाव पूरे वातावरण पर पड़ता है। दीदी ने कहा कि आज मनुष्य समस्याओं का समाधान बाहर खोजता है, जबकि वास्तविक समाधान हमारे भीतर ही छिपा है। मेडिटेशन के माध्यम से जब हम अंतर्मुखी होकर स्वयं को आत्मस्वरूप में अनुभव करते हैं, तब जीवन की सच्ची समझ विकसित होती है। उन्होंने बताया कि राजयोग मेडिटेशन आत्म-ज्ञान के साथ-साथ परमपिता परमात्मा से जुड़ने की दिव्य प्रक्रिया है, जिससे मन को शांति, स्थिरता और संतोष की अनुभूति होती है। उन्होंने कहा कि भागदौड़ भरी जीवनशैली में मेडिटेशन सुकूनभरी नींद, मानसिक शांति और एकाग्रता के लिए अत्यंत आवश्यक है। यह चिंता, तनाव, हृदय रोग तथा अन्य गंभीर बीमारियों में भी सहायक सिद्ध हुआ है। कार्यक्रम में ब्रह्माकुमारी ऋतु दीदी ने राजयोग की गहन अनुभूति कराते हुए कहा कि राजयोग मेडिटेशन व्यक्ति को स्वयं की पहचान कराकर परमात्मा से जोड़ता है। इससे आत्मा के मूल गुण सत्यता, पवित्रता, दया, करुणा, धैर्य और सेवा जागृत होते हैं। कार्यक्रम के अंत में उपस्थित सभी साधकों ने विश्व ध्यान दिवस पर राजयोग मेडिटेशन को अपने जीवन का अभिन्न हिस्सा बनाने तथा संपूर्ण मानवता के कल्याण के लिए सकारात्मक संकल्प लेने का दृढ़ निश्चय किया।

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