देवी अहिल्या यूनिवर्सिटी (डीएवीवी) की परीक्षा और मूल्यांकन व्यवस्था पूरी तरह हाईटेक होने जा रही है। अब परीक्षार्थियों की कॉपियां पेन-पेंसिल से नहीं, बल्कि कम्प्यूटर स्क्रीन पर माउस के जरिये जांची जाएंगी। यूनिवर्सिटी प्रशासन ने इसके लिए टेंडर प्रक्रिया शुरू कर दी है। इसकी शुरुआत अप्रैल-मई में होने वाली एमबीए सेकंड सेमेस्टर की परीक्षा से की जाएगी। प्रदेश की किसी भी पारंपरिक यूनिवर्सिटी में लागू होने वाला यह पहला ऑनलाइन वैल्यूएशन प्रोजेक्ट होगा। यूनिवर्सिटी के इस निर्णय से सबसे बड़ा फायदा रिजल्ट की सटीकता में मिलेगा। अकसर छात्र शिकायत करते हैं कि उनके किसी प्रश्न को जांचने से छोड़ दिया गया या फिर नंबरों को जोड़ने (टोटलिंग) में गलती हुई है। कई बार रिवैल्यूएशन में ऐसी गड़बड़ियां सामने आती हैं। नए सॉफ्टवेयर आधारित सिस्टम में जब तक वैल्यूअर उत्तर पुस्तिका के हर पेज को क्लिक कर जांच नहीं लेगा, तब तक सॉफ्टवेयर मार्कशीट को फाइनल सबमिट नहीं करेगा। इसके साथ ही अंकों की टोटलिंग भी ऑटोमैटिक होगी, जिससे गड़बड़ी की गुंजाइश खत्म हो जाएगी। रिवैल्यूएशन भी आसान हो जाएगा। रिजल्ट से असंतुष्ट छात्रों को उनके ई-मेल पर कॉपियां मिलेगी, जिसे देखने के बाद वे आपत्तियां दर्ज करा सकेंगे। एमबीए के 65 कॉलेजों में 10 हजार छात्र, 80 हजार कॉपियां
एमबीए के 65 कॉलेजों के करीब 10 हजार छात्र-छात्राएं इस बार सेकंड सेमेस्टर की परीक्षा देंगे। इनके 8 विषय के पेपरों की कुल 80 हजार कॉपियों को इस सिस्टम से जांचा जाएगा। पायलट प्रोजेक्ट में 80 हजार कॉपियों का मूल्यांकन किया जाएगा। ऑनलाइन मूल्यांकन के लिए मूल्यांकन सेंटर पर ही एक आईटी लैब बनाने की भी योजना है, जिसमें 50 कंप्यूटर लगाए जाएंगे। 100 से अधिक वैल्यूअर इस काम में
सेंट्रल स्कैनिंग और कॉन्फिडेंशियल आईडी प्रक्रिया के तहत परीक्षा के बाद छात्रों की 32 पेज की कॉपियों को सेंट्रल वैल्यूएशन सेंटर पर हाई-स्पीड स्कैनर्स से स्कैन किया जाएगा। इसके बाद 100 से अधिक चिह्नित वैल्यूअर्स को कॉन्फिडेंशियल लॉगिन आईडी और पासवर्ड दिए जाएंगे। मूल्यांकनकर्ताओं को इस नई पद्धति के लिए विशेष प्रशिक्षण भी दिया जाएगा। अगले चरण में बीएड, लॉ, बीबीए भी
एमबीए जैसे प्रोफेशनल के बाद ट्रेडिशनल कोर्सेस की कॉपियां भी इसी तरह से जंचवाई जाएंगी। अगले चरण में बीएड, लॉ, बीबीए, बीसीए में भी चरणबद्ध तरीके से लागू करेगा। अंत में इसे बीए, बीकॉम और बीएससी जैसे ट्रेडिशनल कोर्सेस के लिए भी शुरू किया जाएगा। वर्तमान में साउथ की कई प्रमुख यूनिवर्सिटीज और प्रदेश की मेडिकल यूनिवर्सिटी में ऑनलाइन मूल्यांकन कराया जा रहा है। ^एमबीए सेकंड सेमेस्टर की आगामी परीक्षा की कॉपियां ऑनलाइन मोड पर ही जंचवाई जाएंगी। इसके लिए टेंडर जारी हो चुके हैं और मूल्यांकनकर्ताओं को विशेष ट्रेनिंग भी दी जाएगी। ऑनलाइन मूल्यांकन कराने वाली डीएवीवी प्रदेश की एकमात्र स्टेट यूनिवर्सिटी होगी।
– प्रो. अशेष तिवारी, परीक्षा नियंत्रक, डीएवीवी


