राजधानी में लोगों की समस्या निदान के लिए लगाए जा रहे शहरी समस्या समाधान शिविर निगम अधिकारियों की लापरवाही से फेल साबित हो रहे हैं। अधिकारी शिविरों में खानापूर्ति कर रहे हैं। लोगों को छोटे-छोटे काम के लिए जनप्रतिनिधियों की सिफारिश करानी पड़ रही हैं। इसके बावजूद अधिकारी बहाना बना गली निकाल कर बच रहे हैं। शिविरों में अधिकारियों का रवैया देखकर जनप्रतिनिधि भी हैरान हो गए। ताजा मामला आमेर-हवामहल, मालवीय नगर और आदर्श नगर जोन का है। यहां पर समाधान शिविर में आए लोगों की फाइलें ही गायब हो गईं। फाइलें गायब होने और काम नहीं होने पर जयपुर सांसद मंजू शर्मा सोमवार को आमेर-हवामहल जोन के शिविर का औचक निरीक्षण किया। सांसद ने अधिकारियों से जनता के कामकाज का ब्यौरा मांगा। अधिकारी ब्यौरा नहीं दे पाए, तब सांसद ने अधिकारियों को फटकार लगाई। शिविर में लोगों ने सांसद को बताया कि पिछले शिविर में फाइलें थी, अब अधिकारी फाइल गायब होना बता रहे हैं। सांसद ने अधिकारियों से कहा कि चार-चार महीने से फाइलें पेंडिंग क्यों रोक रखी है? क्या कारण है। काम का ज्यादा लोड है, तो कम कर देते हैं, अभी छुट्टी लेकर घर बैठ जाओ। 2022 की पेंडिंग फाइलें मिली सांसद को 2022 की फाइलें पेंडिंग मिलीं। इस पर सांसद भड़क गई और अधिकारियों से कहा कि क्या तमाशा बना रखा है? हर काम के लिए जनप्रतनिधियों को सिफारिश करनी होगी क्या? बाबू बोला- मैं बीमार था। इस वजह से काम नहीं हो पाया। सांसद ने कहा कि आप बीमार हैं, तो छुट्टी लेकर जाओ। पीड़ित रमेश ने कहा कि पिछले कैंप फाइल लगाई थी। अब भी पेंडिंग चल रही है। सांसद ने फाइल की स्थिति के बार में जानकारी मांगी तो अधिकारी बोले…एसआईआर में लगा था। लोग बोले- अधिकारी खेल रहे हैं नोटिस-नोटिस: सांसद शर्मा ने कैंप में मौजूद जनता से फीडबैक भी लिया। जनता ने नगर निगम अधिकारियों की लचर कार्यशैली को लेकर नाराजगी जाहिर की। लोगों ने सांसद से कहा कि पिछले कैंप से जो फाइलें निगम में चल रही हैं, वह अब तक पेंडिंग हैं। अधिकारियों को शिकायत करते हैं, लेकिन सुनवाई नहीं हो रही है। क्षेत्र में अवैध निर्माण की बाढ़ आ गई है। अधिकारी कार्रवाई करने की अपेक्षा नोटिस-नोटिस खेल रहे हैं। सरकारी संपत्तियों पर कब्जे किए जा रहे हैं, लेकिन निगम के अधिकारी कोई कार्रवाई नहीं कर रहे हैं।


