राज्य के गैर सरकारी सहायता प्राप्त अल्पसंख्यक, माध्यमिक, मदरसा व संस्कृत विद्यालय में पढ़ने वाले छात्रों के लिए एक अच्छी खबर है। इन स्कूलों के 9वीं और 10वीं के छात्र-छात्राओं को नि:शुल्क किताबें और कॉपी मिलेंगी। इससे करीब 50 हजार छात्रों को सीधा फायदा मिलेगा। स्कूली शिक्षा मंत्री रामदास सोरेन ने विभागीय प्रस्ताव पर मंजूरी दे दी है। कैबिनेट से मंजूरी मिलने के बाद सरकार योजना को लागू कर देगी। 2025-26 शैक्षणिक सत्र से छात्र छात्राओं को इसका लाभ मिलने लगेगा। अबतक केवल सरकारी विद्यालयों में पढ़ने वाले छात्र-छात्राओं को ही नि:शुल्क किताब-कॉपी मिलती हैं। इन स्कूलों के छात्र- छात्राओं के नि:शुल्क किताबें और कॉपी देने पर करीब 5 करोड़ रुपए खर्च होने का अनुमान है। जानकारी के अनुसार गैर सरकारी सहायता प्राप्त वित्त सहित अल्पसंख्यक, माध्यमिक, मदरसा, संस्कृत विद्यालय के एक छात्र के किताब-कॉपी पर हर साल 1202 रुपए खर्च होंगे। 902 रुपए किताब और 10 कॉपी पर 300 रुपए खर्च होना है। सरकारी विद्यालयों के छात्रों पर औसतन प्रति छात्र 1550 रुपए सरकार खर्च करती है। जिसमें दो सेट पोशाक के लिए 600 रुपए, किताब के लिए 750 रुपए और 10 कॉपी के लिए 200 रुपए व्यय होता है। छात्रों को साइंस व कॉम्पीटिटिव मैगजीन भी देगी सरकार स्कूली शिक्षा और साक्षरता विभाग ने राज्य के सरकारी विद्यालयों में पढ़ रहे कक्षा 9 वीं से लेकर 12वीं के छात्र- छात्राओं को साइंस मैगजीन भी देने का फैसला किया है। इसके अलावा 11वीं और 12वीं कक्षा के छात्रों को कॉम्पीटिटिव मैगजीन भी उपलब्ध कराई जाएगी। इस पर भी राज्य योजना प्राधिकृत समिति की मंजूरी मिल गई है। समिति ने मैगजीन की छपाई व वितरण के लिए 43 करोड़ खर्च करने पर भी सहमति दे दी है। विभाग ने प्रस्ताव को कैबिनेट भेज दिया है।


