अब कलेक्ट्रेट कूच की तैयारी:सात दिनों से धरने पर बैठे ग्रामीण, नहीं हुई कोई सुनवाई, मकानों में दरारें और गिरते जलस्तर ने बढ़ाई चिंता

अवैध खनन के विरुद्ध ग्रामीणों का आक्रोश अब आंदोलन का रूप ले चुका है। ग्राम हुकुमपुरा, बामलास, खेदड़ों की ढाणी एवं खरबासों की ढाणी में जारी शांतिपूर्ण धरने के सातवें दिन ग्रामीणों ने आर-पार की लड़ाई का ऐलान कर दिया है। प्रशासन और जनप्रतिनिधियों की निरंतर अनदेखी से क्षुब्ध होकर अब ग्रामीणों ने झुंझुनू जिला कलेक्ट्रेट पर सांकेतिक धरना देने और मुख्यमंत्री के नाम ज्ञापन सौंपने का सर्वसम्मत निर्णय लिया है। दरकते मकान और गहराता जल संकट ग्रामीणों का आरोप है कि खनन माफियाओं द्वारा की जा रही अंधाधुंध ब्लास्टिंग के कारण आसपास के गांवों के सैकड़ों मकानों में गहरी दरारें आ गई हैं, जिससे कभी भी बड़ा हादसा हो सकता है। क्षेत्र का भू-जल स्तर चिंताजनक रूप से नीचे गिर गया है। धूल और प्रदूषण के कारण लोगों में कई प्रकार की बीमारियां बढ़ गई है। खेती पर बुरा असर पड़ रहा है। मरुसेना फाउंडेशन के एडवोकेट जयन्त मूंड ने कहा कि कड़ाके की सर्दी में सात दिनों से किसान और बुजुर्ग खुले आसमान के नीचे बैठे हैं, लेकिन स्थानीय प्रशासन और जनप्रतिनिधियों ने चुप्पी साध रखी है। यह असंवेदनशीलता न केवल निंदनीय है, बल्कि जनहित के विरुद्ध भी है। कॉमरेड मूलचंद खरीटां ने कहा कि प्रशासन की मूक सहमति से खनन माफिया अरावली की प्राकृतिक संपदा को लूट रहे हैं। उन्होंने कहा कि आम आदमी के जीवन-यापन पर संकट खड़ा हो गया है और उनकी मेहनत की कमाई से बनाए गए मकान खंडहर में तब्दील हो रहे हैं। धरने में पूर्व सरपंच दारासिंह मेघवंशी, कॉमरेड हरिराम सीथल, सूबेदार गिरधर सिंह, सवाई सिंह, सूबेदार महादेव सिंह, लीलाधर मीणा, कैप्टन विनोद सिंह सहित सैकड़ों की संख्या में मातृशक्ति और युवा मौजूद रहे।

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