जिले के आरोन इलाके से 7 साल पहले गायब हुई नाबालिग के मामले की जांच अब CBI करेगी। हाई कोर्ट ग्वालियर की दो जजों की डिविजन बेंच ने मंगलवार को यह आदेश दिए। उन्होंने CBI को भी निर्देशित किया कि 15 दिन के अंदर इस मामले में SIT का गठन करें। बच्ची के पिता द्वारा लगाई गई याचिका पर कोर्ट ने यह आदेश दिया। याचिकाकर्ता की ओर से एडवोकेट अनिल श्रीवास्तव ने पैरवी की। बता दें कि मामला आरोन तहसील का है। यहां एक पिता अपनी 17 साल की बेटी के साथ रहता था। नाबालिग 1 अगस्त 2017 को सुबह 11 बजे राशन दुकान पर मिट्टी का तेल लेने गई थी। काफी देर तक वापस नहीं आई तो पिता उसे तलाशने के लिए निकला। उसे कंट्रोल की दुकान बंद मिली। आस-पास वालों से पूछा, लेकिन पता नहीं चला। गांव भर के तीन चक्कर लगाए, लेकिन कहीं कोई खबर नहीं मिली। दूसरे दिन थाने पहुंचा तो पुलिस ने भगा दिया गया। FIR भी 10 दिन बाद दर्ज की थी 3 अगस्त को पिता सुबह से रात 8 बजे तक थाने में बैठा रहा, तब जाकर पुलिस ने उससे आवेदन लिया। पुलिस ने FIR 9 अगस्त को दर्ज की। हालांकि, लड़की को ढूंढने के प्रयास नहीं किए। बाद में दो संदिग्ध लोग पकड़े, जिनको साक्ष्य के अभाव में छोड़ दिया गया। इस मामले में पता चला कि एक ने कहा कि उसने नाबालिग के साथ रेप के बाद मर्डर कर तालाब में फेंक दिया था। इसके बाद इंवेस्टीगेशन के लिए 3 SIT भी बनाई गई, लेकिन लड़की का पता नहीं चल सका। फिर हाईकोर्ट में लगाया केस लापता बेटी के पिता ने हाईकोर्ट में बंदी प्रत्यक्षीकरण की याचिका दायर की। याचिका की सुनवाई करते हुए हाईकोर्ट सख्त हुआ। थाना प्रभारी से लेकर, तत्कालीन ASP, SP, यहां तक कि IG को कोर्ट के सामने हाजिर होना पड़ा। कोर्ट की सख्ती के बाद ही अगस्त 2023 में पुलिस को कोर्ट में हलफनामा देकर रोड मैप देना पड़ा। इसमें पुलिसकर्मियों को ऐसे केस में गहन जांच और पुलिसिया रवैए के ऊपर ट्रेनिंग देने की बात कही। कोर्ट के आदेश के बाद 300 पुलिसकर्मियों को ग्वालियर में ट्रेनिंग तक दी गई। चार लोगों के नार्को टेस्ट हुए याचिकाकर्ता के वकील एडवोकेट अनिल श्रीवास्तव ने बताया कि 1 अगस्त 2017 को एक नाबालिग लड़की गायब हुई थी। उसकी तलाश के लिए पुलिस ने कई SIT गठित कीं, लेकिन उसका पता नहीं चल सका। उनमें भी जांच के बाद कोई रिजल्ट निकलकर नहीं आया। चार लोगों का नार्को टेस्ट हुआ, जिसमें सविता भाई, जितेंद्र, गजेन्द्र और सोनू शामिल थे। एक व्यक्ति नीलम चिढ़ार का ब्रेन ओसिफिकल टेस्ट हुआ। इन टेस्ट में कुछ पुलिस अधिकारियों, कर्मचारियों के नाम भी आए। टेस्ट की रिपोर्ट के बाद भी पुलिस ने कोई कार्रवाई नहीं की 15 दिन में SIT बनाई CBI मंगलवार को ग्वालियर हाई कोर्ट की डिविजन बेंच ने नाराजगी जाहिर करते हुए मामले को सीबीआई को सौंपने के आदेश दिए। हाई कोर्ट के एडिशनल सॉलिसिटर जनरल को निर्देश दिए हैं कि वह 15 दिन में पुलिस से अभी तक की संपूर्ण कार्रवाई के दस्तावेज लेकर CBI को सौंप दें। CBI 15 दिन में SIT गठित करे। पूरी इन्वेस्टिगेशन अब CBI करेगी। उस समय जो भी व्यक्ति थे, जिन्होंने जांच प्रभावित की, उनके खिलाफ भी SIT जांच कर कार्रवाई करेगी।


