अब जमीन पर उतरने लगी जयपुर नॉर्दर्न रिंग रोड परियोजना:99 किमी रिंग बनेगी, भूमि नपाई शुरू, 200 गांवों से होकर निकलेगी

केंद्र सरकार से स्वीकृति मिलने के बाद जयपुर नॉर्दर्न रिंग रोड परियोजना अब जमीन पर उतरने लगी है। राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (एनएचएआई) ने निर्माण के पहले चरण के रूप में भूमि की नपाई और फील्ड सर्वे शुरू कर दिया है। निजी कंपनी की टीम ने अजमेर रोड पर बगरू के पास छितरोली से वह स्थान चिन्हित किया है, जहां से रिंग रोड की शुरुआत मानी जा रही है। यहीं से आगे कालवाड़, जोबनेर, रामपुरा डाबड़ी, जालसू और चौमूं तक जहां भी खाली जमीन उपलब्ध है, वहां लगातार जमीन नापने का काम चल रहा है। इस परियोजना के तहत छितरोली (अजमेर रोड) से बगराना होते हुए आगरा रोड (बस्सी) तक लगभग 99.350 किमी लम्बी एवं 6-लेन नॉर्दर्न रिंग रोड बनाई जाएगी। इसके लिए कुल 200 गांवों की भूमि अधिग्रहित होगी, जिसका उपयोग सड़क निर्माण, चौड़ीकरण, रखरखाव और प्रबंधन कार्यों में होगा। एनएचएआई ने अधिनियम-1956 की धारा 3(क) के तहत अधिसूचना जारी कर अतिरिक्त जिला कलेक्टर-II, जयपुर को भूमि अधिग्रहण का सक्षम प्राधिकारी घोषित कर दिया है। परियोजना से मिलने वाला बड़ा लाभ नॉर्दर्न रिंग रोड बनने के बाद अजमेर से जयपुर होकर दिल्ली जाने वाले वाहनों को शहर में घुसने की जरूरत नहीं पड़ेगी। वे शहर से 20 किमी पहले ही रिंग रोड पकड़कर सीधे दिल्ली हाईवे तक पहुंच सकेंगे। यही सुविधा आगरा और अजमेर हाईवे के कनेक्शन पर भी लागू होगी। इससे न सिर्फ शहर में आने वाले भारी वाहनों की संख्या घटेगी, बल्कि प्रदूषण कम होगा और ट्रैफिक दबाव में बड़ी कमी आएगी। साथ ही जयपुर के आसपास की लॉजिस्टिक इंडस्ट्री, परिवहन कारोबार और रियल एस्टेट को भी बड़ा बढ़ावा मिलने की उम्मीद है। नॉर्दर्न रिंग रोड इन बड़े इलाकों से गुजरेगी हलचल तेज; अधिसूचना जारी होते ही गांवों में हलचल बढ़ गई। ग्रामीण मुआवजे की दरें और जमीन के मूल्यांकन को लेकर पंचायत स्तर पर चर्चा कर रहे हैं। कई जगहों पर किसानों ने बैठक बुलाकर मुआवजे की शर्तें स्पष्ट करने की मांग की है। एडीएम–2 मेघराज मीणा ने बताया कि सर्वे पूरा होने पर म्यूटेशन डेटा तैयार होगा, इसके बाद अधिग्रहण के नोटिस जारी किए जाएंगे।

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