कंपकपाती ठंड की लंबी रातों के बाद जब धूप में हल्की ऊष्मा घुलने लगती है। हवा में फूलों की सुगंध तैरने लगती है और प्रकृति नवजीवन का संदेश देने लगती है, तब समझ लेना चाहिए कि ऋतुराज वसंत का आगमन हो चुका है। यही वह ऋतु है जिसे भारतीय परंपरा में ऋतुओं का राजा कहा गया है। भगवान श्रीकृष्ण ने गीता में कहा है ‘ऋतुओं में मैं वसंत हूं।’ इसी पावन ऋतु के स्वागत में शुक्रवार को वसंत पंचमी का त्योहार मनाया जाएगा। वसंत ऋतु का आगमन केवल मौसम के बदलने तक सीमित नहीं रहता, बल्कि इसका प्रभाव जीवन के हर क्षेत्र में दिखाई देता है। प्रकृति में जहां पेड़-पौधे नए पत्तों और फूलों से सुसज्जित होते हैं, वहीं किसानों के लिए यह समय फसलों के बेहतर विकास का संकेत देता है। शिक्षा, ज्ञान के क्षेत्र में वसंत पंचमी को शुभारंभ का प्रतीक माना जाता है। इसी दिन बच्चों के लिए विद्या की शुरुआत, पुस्तक पूजन और नई सृजनात्मक गतिविधियों की शुरुआत की परंपरा है। वसंत ऋतु के आगमन के साथ ही रांची में मौसम भी अंगड़ाई लेने लगा है। कंपकपाती ठंड से लोगों को राहत मिल गई है। सुबह और शाम अब हल्की सिहरन हो रही है, लेकिन दिन में धूप गर्माहट का अहसास कराने लगी है। सरस्वती पूजा के दिन हल्की ठंड का अहसास होगा, पर इसके बाद मौसम में तेजी से बदलाव देखने को मिलेगा। मौसम विभाग रांची केन्द्र के अनुसार वसंत पंचमी के बाद अगले चार दिनों में न्यूनतम तापमान में लगभग 4 डिग्री सेल्सियस तक की बढ़ोतरी होगी। इसका मतलब है कि अब ठंड की विदाई शुरू हो गई है। इस बदलाव के साथ शुक्रवार को शहर के विभिन्न मुहल्लों में विद्या की देवी मां सरस्वती की अराधना होगी। 600 पूजा पंडालों में कहीं एआई आधारित तो कहीं श्रृंगार करते हुए मां सरस्वती विराजेंगी। तीन दुर्लभ संयोग में होगी मां शारदे की आराधना ज्योतिष शालिनी वैद्य ने बताया कि तीन दुर्लभ योग में मां सरस्वती की आराधना होगी। इस दिन लक्ष्मी नारायण योग, बुधादित्य योग, परिघ योग बन रहे हैं। पूरे दिन बुध, सूर्य और शुक्र का युति गुरुदीक्षा और विद्यारंभ मुहूर्त रहेगा। ऋषिकेश पंचांग के अनुसार वसंत पंचमी 22 जनवरी 2026 को रात्रि 01.16 बजे से शुरू हो जाएगी। पंचमी तिथि का समापन 23 जनवरी को रात्रि 12.08 बजे पर होगा। उदयातिथि के चलते पंचमी का त्योहार 23 फरवरी को मनाया जाएगा। सुबह से शाम तक माता की पूजा होगी, लेकिन पूजा का शुभ मुहूर्त सुबह 09.27 से दोपहर 02.34 बजे तक है। किशोरगंज स्थित रोड नंबर 5 में बनाए गए पंडाल में एआई से निकाली गई तस्वीर के आधार पर मां सरस्वती की प्रतिमा स्थापित की गई है। आयोजक संदीप ने बताया कि फिलहाल एआई ही सबसे अधिक चर्चा में है। इसलिए एआई थीम की प्रतिमा बनाने का निर्णय लिया गया। इस स्वरूप में मां बाल रूप में नजर आएगी। उनके साथ हंस भी बाल स्वरूप में है। 9.5 फीट ऊंची इस प्रतिमा की कीमत 31 हजार रुपए है। वहीं, मधुकम स्थित नारिया नगर में फूलों से बने पंडाल में शृंगार करते हुए मां विराजमान हुई हैं। प्रतिमा में इतना अधिक आकर्षण है, जिसकी भी नजर पड़ रही, उसकी पलकें नीचे नहीं हो रही है। मां की आभा देखते ही बन रही है। 30 हजार में प्रतिमा का निर्माण कराया गया है।


