राजस्थान की सड़कों पर दौड़ रहे अनफिट वाहनों और परिवहन विभाग में फिटनेस सर्टिफिकेट के नाम पर चल रहे ‘जुगाड़ सिस्टम’ पर हाईकोर्ट ने सख्त रुख अपनाया है। राजस्थान हाईकोर्ट के जस्टिस डॉ. पुष्पेंद्र सिंह भाटी और जस्टिस संदीप शाह की डिवीजन बेंच ने स्पष्ट कर दिया है कि सड़क सुरक्षा से कोई समझौता नहीं किया जा सकता। कोर्ट ने राज्य सरकार की ओर से दायर विभिन्न अपीलों का निस्तारण करते हुए कहा है कि 15 अप्रैल 2026 से पूरे राजस्थान में वाहनों की फिटनेस जांच आवश्यक रूप से ऑटोमेटेड टेस्टिंग स्टेशन्स से ही होगी। यानी, इस तारीख के बाद मैनुअल तरीके से नए फिटनेस सर्टिफिकेट जारी नहीं किए जाएंगे। सरकार की अपील स्वीकार, संसाधनों की कमी पर मिला समय राज्य सरकार ने एकल पीठ के 25 सितंबर 2025 को पारित आदेशों को चुनौती दी थी, जिनमें फिटनेस सेंटर्स को लेकर कुछ रियायतें दी गई थीं। सुनवाई के दौरान राज्य सरकार की ओर से वकील ने कोर्ट को बताया कि सरकार ऑटोमेटेड सिस्टम लागू करने के लिए प्रतिबद्ध है, लेकिन वर्तमान में परिचालन और ढांचागत बाधाओं के कारण इसे तत्काल प्रभाव से हर जगह लागू करने में कठिनाई है। इस पर खंडपीठ ने व्यावहारिकता को देखते हुए सरकार को 15 अप्रैल तक का समय दिया है, ताकि व्यवस्था को सुचारू किया जा सके। कोर्ट ने निर्देश दिया कि इस तारीख से यह योजना पूरी तरह और सख्ती से लागू मानी जाएगी। नजदीकी सेंटर पर जाना होगा, मैनुअल की छूट नहीं कोर्ट ने अपने फैसले में स्पष्ट किया है कि 15 अप्रैल के बाद, भले ही किसी क्षेत्र में एटीएस की सुविधा सीमित स्थानों पर ही उपलब्ध हो, वाहन मालिकों को फिटनेस सर्टिफिकेट प्राप्त करने के लिए अपने निकटतम परिचालन एटीएस पर जाना होगा। सुविधाओं की कमी या दूरी का हवाला देकर मैनुअल जांच की अनुमति नहीं दी जाएगी। कोर्ट का यह रुख दर्शाता है कि सड़क सुरक्षा और वाहनों की तकनीकी गुणवत्ता से कोई समझौता नहीं किया जाएगा। 20 लाख की सिक्योरिटी और आवेदन प्रक्रिया सिक्योरिटी डिपॉजिट: कोर्ट ने एकल पीठ के उस निर्णय को बरकरार रखा है, जिसमें सेंटर स्थापित करने के लिए 20 लाख रुपए की सिक्योरिटी राशि जमा कराना अनिवार्य किया गया था। 60 दिन में निपटाएं आवेदन: कोर्ट ने विभाग को निर्देश दिया है कि एटीएस खोलने के लिए जो आवेदन पहले से प्राप्त हो चुके हैं, उन्हें 60 दिनों के भीतर प्राथमिकता से प्रोसेस किया जाए। साथ ही, 31 जुलाई 2025 से पहले प्राप्त आवेदनों पर 31 जनवरी तक निर्णय लेने का निर्देश दिया गया है। ये 14 फिटनेस सेंटर्स थे मामले में शामिल इस मामले में कुल 14 फिटनेस सेंटर्स प्रतिवादी के रूप में शामिल थे। इनमें नोखा (बीकानेर) स्थित राजस्थान व्हीकल फिटनेस सेंटर (संचालक शिवलाल डूडी), उदयपुर का उदयपुर फिटनेस सेंटर (संचालक भूपेंद्र सिंह यादव), पीपाड़ सिटी (जोधपुर) का नवदीप फिटनेस टेस्ट सेंटर (संचालक दीपक सोमानी) और जोधपुर का महादेव फिटनेस सेंटर (संचालक कंचन) शामिल हैं। इसके अलावा मेहलावास (जोधपुर) स्थित रॉयल मोटर्स फिटनेस सेंटर (संचालक रामसिंह चौधरी), नागौर का मारवाड़ फिटनेस सेंटर (संचालक लिखमाराम), डेगाना (नागौर) का अलवर फिटनेस सेंटर (संचालक शिवकुमार), ब्यावर (अजमेर) का पवन व्हीकल फिटनेस सेंटर (संचालक पवन कुमार मित्तल) और मेड़ता सिटी का मीरा फिटनेस सेंटर (संचालक इंदरचंद फिरोदा) शामिल हैं। इनके अलावा मंगलाना (नागौर) का वाहन फिटनेस सेंटर (संचालक राजेंद्र सिंह राठौड़), सिरोही का प्रेरणा परिवहन फिटनेस सेंटर (संचालक अनिल परिहार), दौसा का शिवकृपा फिटनेस सेंटर (संचालक नवदीप लाला), बोरुंदा (जोधपुर) का प्रेक्षा परिवहन फिटनेस सेंटर (संचालक इंदरचंद) और स्वरूपगंज (सिरोही) का बालाजी एलायंस (संचालक खूम सिंह सोलंकी) भी शामिल हैं। आम जनता और ट्रांसपोर्टर्स पर संभावित असर! इस फैसले के दूरगामी परिणाम होंगे: सख्ती: अब हेडलाइट, ब्रेक, स्टीयरिंग और प्रदूषण की जांच मशीनों से होगी। मशीन का डेटा सीधे सर्वर पर जाएगा, जिसे बदला नहीं जा सकेगा। महंगाई: एटीएस स्थापित करने की लागत करोड़ों में होती है, इसलिए संभव है कि भविष्य में फिटनेस जांच की फीस में थोड़ी बढ़ोतरी हो। सुरक्षा: सबसे बड़ा फायदा यह होगा कि अनफिट कमर्शियल वाहन, जो अक्सर हादसों का कारण बनते हैं, सड़कों से हट जाएंगे। समय: वाहन मालिकों को अब अपनी गाड़ी की फिटनेस कराने के लिए दूसरे शहरों का चक्कर भी लगाना पड़ सकता है, जिससे उनका समय और ईंधन दोनों खर्च होगा।


