अब नहीं डूब रही रकम:सरकारी-निजी बैंकों ने रिकवरी का काम सौंपा निजी एजेंसियों को

कुछ साल पहले तक लोन वसूली मसल पॉवर के बिना संभव नहीं मानी जाती थी। लोन लेने वाले की गाड़ी सड़क से छिन लेना, घरों के बाहर खड़े होकर धमकी देना और कई बार तो मारपीट करना आम बात थी। पर अब ट्रेंड बदल गया है। नए कल्चर में सरकारी हो या निजी बैंक, सभी ने लोन वसूली का सौ फीसदी काम प्राइवेट एजेंसियों को सौंप दिया गया है। एसबीआई, पीएनबी, बैंक ऑफ बड़ौदा, एचडीएफसी, आईसीआईसीआई, आईडीबीआई समेत कोई भी बैंक ऐसा नहीं है जो लोन वसूली का काम खुद करता है। बैंक ही नहीं फोन पे, भारत पे, पेटीएम, टाटा कैपिटल जैसे बड़े डिजिटल बैंकिंग वालों की भी लोन वसूली का निजी एजेंसी वाले ही कर रहे हैं। बैंकों के लोन वसूली विभाग की पड़ताल से पता चला कि केवल रायपुर में ही 30 से ज्यादा एजेंसियां काम कर रही हैं। प्रदेश में इनकी संख्या 950 से ज्यादा है। हर साल ये एजेंसियां 1000 करोड़ से ज्यादा की लोन वसूली कर रही है। लोन वसूली का काम कर रही एजेंसियों में अब एमबीए, इंजीनियरिंग, फाइनेंशियल जैसे बड़े डिग्री वालों की इंट्री हो गई है। एजेंसी में एक भी व्यक्ति को ऐसा रखा नहीं जाता है जो पढ़ा-लिखा न हो। क्रिमिनल रिकार्ड होने पर भी नहीं रखा जा रहा है। लोन एजेंसी का काम लेने वालों को इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ बैंकिंग से पास आउट होकर उसका सर्टिफिकेट लेना जरूरी है। पुलिस वेरिफिकेशन भी अनिवार्य है। इसी वजह से अब इस काम का तरीका बदल गया है। राजधानी में पिछले दो साल में लोन वसूली को लेकर 10 एफआईआर भी नहीं हुई है। सैकड़ों युवा ऐसे हैं जिन्होंने लोन वसूली के काम को नए स्टार्ट अप के तौर पर लिया है। बैंकर्स समिति ने भी माना लोन वसूली शत-प्रतिशत लोन बांटने और इसकी वसूली करने के काम से बैंकों ने खुद और अपने स्टाफ को अलग कर लिया है। छत्तीसगढ़ राज्य स्तरीय बैंकर्स समिति की 1 अप्रैल 2024 से मार्च 2025 तक जारी की गई रिपोर्ट में बताया गया है कि बैंकों के डूबत लोन का आंकड़ा अब 4 प्रतिशत भी नहीं रह गया है। कुछ साल पहले तक यह आंकड़ा 15 से 20 फीसदी तक होता है। कुछ बैंक और प्राइवेट फाइनेंशियल कंपनियां ऐसी भी थी जिनका डूबत लोन 30 फीसदी तक पहुंचा था। इससे कई संस्थान बंद होने की कगार पर आ गए थे। बैंकों ने इसी से सबक लेते हुए रिकवरी का काम निजी एजेंसियों को सौंपना शुरू कर दिया है। जितना अच्छा काम उतना ज्यादा बोनस लोन वसूल करने वाली एजेंसियों को बैंक की ओर से तगड़ा कमीशन और बोनस दिया जा रहा है। इस वजह से वे स्टाफ भी क्वालीफाइड रख रहे हैं। एक-एक एजेंसी वालों के पास 50 से 100 लोगों तक का स्टाफ है। इसमें कॉल सेंटर से लेकर मैनेजर तक के पद हैं। इन एजेंसियों में काम करने वाले स्टाफ की न्यूनतम सैलरी 15 हजार से शुरू होती है। बड़े पदों पर काम करने वालों को एक लाख रुपए तक का पैकेज दिया जा रहा है। यही वजह है कि बेहतर पढ़ाई करने वाले युवा भी इस सेक्टर से जुड़ रहे हैं। बड़ी एजेंसी वालों के पास ऐसा स्टाफ भी जो हाईटेक शहरों में बड़ी कंपनियों में काम करने के बाद उसी पैटर्न से रायपुर में काम कर रहे हैं। इसलिए बैंक वाले एजेंसियों को सौंप रहे काम रिकवरी एजेंटों के बारे में जाने

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