मप्र में भवन निर्माण का तरीका जल्द बदल सकता है। सरकार अब थ्रीडी प्रिंटिंग आधारित निर्माण तकनीक अपनाने की तैयारी कर रही है। इससे निर्माण कार्य तेजी से पूरे होंगे और पर्यावरण को भी नुकसान नहीं पहुंचेगा।
लोक निर्माण विभाग के मंत्री राकेश सिंह ने इस दिशा में पहल करते हुए भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान (आईआईटी) मद्रास का दौरा किया। वहां उन्होंने थ्रीडी प्रिंटिंग से बने भवनों और संरचनाओं काे देखा। पीडब्ल्यूडी मंत्री ने कहा कि देश में 4 जगहों पर थ्रीडी बिल्डिंग पर काम हो रहा है। हमारी टीम बाकी तीन जगहों को भी देखेगी, फिर हर जगह की बेस्ट प्रैक्टिस के आधार पर मप्र का मॉडल तैयार किया जाएगा। ये तय है कि इससे पर्यावरण को सबसे अधिक फायदा होगा। हालांकि अभी इसे सभी निर्माण कार्यों में लागू नहीं किया जाएगा। पहले पायलट प्रोजेक्ट शुरू किए जाएंगे। इसके लिए विभाग के इंजीनियरों को विशेष प्रशिक्षण दिया जाएगा और तकनीकी संस्थानों व स्टार्ट-अप्स के साथ समन्वय बनाया जाएगा। थ्रीडी प्रिंटिंग… इस तकनीक में विशेष कंक्रीट, फाइबर और सीमेंट कंपाउंड का उपयोग होता है 3D प्रिंटिंग से भवन कैसे बनते हैं?
3D प्रिंटिंग भवन बनाने की प्रक्रिया पूरी तरह डिजिटल होती है। सबसे पहले कंप्यूटर पर भवन का डिजाइन तैयार किया जाता है। फिर यह डिजाइन 3D प्रिंटर मशीन में डाला जाता है। मशीन एक विशेष नोजल से कंक्रीट जैसी सामग्री निकालकर परत-दर-परत दीवारें और ढांचा खड़ा करती जाती है। इससे कुछ ही दिनों में स्ट्रक्चर तैयार हो सकता है। लागत घटती है क्योंकि ईंट, शटरिंग व मजदूरी कम लगती है 3D प्रिंटिंग में कौन-कौन सी सामग्री उपयोग होती है?
विशेष कंक्रीट मिश्रण। सीमेंट आधारित कंपाउंड। फाइबर युक्त मजबूत सामग्री। कुछ मामलों में रिसाइकल्ड निर्माण सामग्री। यह सामग्री इस तरह बनाई जाती है कि वह मशीन से आसानी से प्रिंट हो सके और जल्दी मजबूत भी हो जाए। 3D प्रिंटिंग भवनों के फायदे क्या?
पर्यावरण को फायदा होता है-पेड़ कटने से बचेंगे, प्रदूषण और निर्माण कचरा कम होगा, ईंट-भट्टों पर निर्भरता घटेगी। मप्र में इसका भविष्य क्या है और क्या-क्या चुनौतियां हैं?
मप्र भी इस तकनीक को अपनाने की तैयारी कर रहा है। भविष्य में इसका उपयोग स्कूल, अस्पताल, अस्थायी घर, सार्वजनिक भवन और सिंहस्थ 2028 जैसे बड़े आयोजनों में हो सकता है। चुनौतियां : शुरुआती मशीनें महंगी हैं। इंजीनियरों को विशेष प्रशिक्षण चाहिए। सुरक्षा मानक और नियम तय होने बाकी हैं। ऊंची इमारतों में उपयोग अभी सीमित है। सिंहस्थ 2028 की तैयारी.. पीडब्ल्यूडी अब इस तकनीक पर तेजी से काम करेगा। उज्जैन में होने वाले सिंहस्थ कुंभ जैसे बड़े आयोजन को देखते हुए डिजाइन तैयार किए जाएंगे।


