अब फरवरी में शुरू होगा संघर्ष का अगला पड़ाव:यह माह लोगों के बीच जा लामबंद करेगी कांग्रेस, फिर सड़क जाम से लेकर भाजपा नेताओं के घरों का घेराव

केंद्र सरकार की G RAM G योजना के विरोध में पंजाब कांग्रेस ने अपना आंदोलन तेज कर दिया है। बीते पांच दिनों में प्रदेशभर में 9 रैलियां कर कांग्रेस ने साफ संकेत दे दिया है कि आने वाले दिनों में संघर्ष और उग्र होगा। पार्टी ने अगली रणनीति के तहत फरवरी माह में नए कार्यक्रमों का ऐलान करने की तैयारी कर ली है, जिसमें सड़क जाम से लेकर भाजपा नेताओं के घरों के घेराव तक शामिल होंगे। पार्टी नेतृत्व ने तब तक सभी कांग्रेस नेताओं को लोगों के बीच जाकर आंदोलन के लिए लामबंद करने के निर्देश दिए हैं। इन रैलियों के दौरान एक अहम सवाल यह भी बना रहा कि क्या प्रदेश प्रभारी भूपेश बघेल पार्टी के बिखरे नेताओं को एक मंच पर ला पाएंगे। आखिरी रैली में दिखी एकजुटता की झलक गुरुहरसहाय में हुई आखिरी रैली में कांग्रेस प्रभारी भूपेश बघेल इस लक्ष्य में काफी हद तक सफल नजर आए। पिछली आठ रैलियों से दूरी बनाए हुए पूर्व मुख्यमंत्री चरणजीत सिंह चन्नी और वरिष्ठ नेता राणा गुरजीत सिंह इस रैली में शामिल हुए। हालांकि, सुखजिंदर सिंह रंधावा और प्रताप सिंह बाजवा की गैरमौजूदगी भी चर्चा का विषय रही। भूपेश बघेल के बयान से सियासी हलचल आखिरी दिन पत्रकारवार्ता के दौरान भूपेश बघेल के बयान ने पार्टी के भीतर नई बहस छेड़ दी। उन्होंने कहा कि 2022 के विधानसभा चुनाव में हुई गलतियों की वजह से कांग्रेस को हार का सामना करना पड़ा। बघेल ने संकेत दिया कि आगामी चुनावों में पार्टी किसी एक व्यक्ति को मुख्यमंत्री चेहरा बनाकर नहीं उतरेगी, बल्कि सामूहिक नेतृत्व के साथ चुनाव लड़ा जाएगा।उनके इस बयान से वे नेता असहज हो गए हैं, जो खुद को मुख्यमंत्री पद के दावेदार के तौर पर पेश कर रहे थे। साथ ही बघेल ने यह भी साफ किया कि फिलहाल प्रदेश नेतृत्व में किसी बदलाव की योजना नहीं है। राजा वडिंग रहे सबसे ज्यादा चर्चा में इन रैलियों के दौरान सबसे ज्यादा सुर्खियों में रहे पंजाब कांग्रेस अध्यक्ष अमरिंदर सिंह राजा वडिंग। महिलाओं को दिए जाने वाले पैसे के कथित गलत हिसाब और मुख्यमंत्री चेहरे को लेकर दिए गए उनके बयान ने राजनीतिक हलकों में खासी चर्चा बटोरी। इस पर मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान ने तंज कसा, जिसके बाद वडिंग को सफाई भी देनी पड़ी। कुल मिलाकर, G RAM G के मुद्दे पर कांग्रेस का आंदोलन अब निर्णायक मोड़ की ओर बढ़ता दिख रहा है, जहां फरवरी के कार्यक्रम पार्टी की सियासी दिशा तय कर सकते हैं।

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