छत्तीसगढ़ के गरियाबंद स्थित उदंती सीता नदी अभयारण्य में ढाई साल बाद बाघ की वापसी हुई है। शनिवार की रात एक बैल का शिकार करते हुए बाघ कैमरे में कैद हुआ। अभयारण्य प्रशासन ने पिछले डेढ़ साल में वन्य प्राणियों के लिए अनुकूल माहौल बनाने में सफलता हासिल की है। उपनिदेशक वरुण जैन के अनुसार, बफर जोन से 250 अतिक्रमण हटाए गए। इन अतिक्रमणकारियों ने 700 हेक्टेयर वन क्षेत्र में 7 बड़ी बस्तियां बसा ली थीं और वन्य प्राणियों का शिकार भी करते थे। प्रशासन ने गर्मी के मौसम में पहली बार कोर जोन के 8 बड़े तालाबों को सोलर पंप से भर दिया। बाघ कॉरिडोर में 1000 से अधिक झीरिया बनाए गए। इन प्रयासों के कारण न केवल बाघ की वापसी हुई, बल्कि अन्य वन्य प्राणियों की संख्या में भी वृद्धि देखी गई। वरुण जैन, उपनिदेशक उदंती सीता नदी अभयारण्य ने बताया कि 1852 वर्ग किलोमीटर में फैले इस अभयारण्य के कोर जोन में 51 और बफर जोन में 59 गांव हैं। तौरेंगा और अरसी कन्हार रेंज वन्य प्राणियों के लिए सुरक्षित क्षेत्र माने जाते हैं। 2 साल पहले हर साल 8-10 वन्य प्राणियों का शिकार होता था और वन्य प्राणियों के हमलों से ग्रामीण भी प्रभावित होते थे। अतिक्रमण हटने और जल प्रबंधन बेहतर होने से मानव-वन्यजीव संघर्ष में कमी आई है।


