झारखंड ने ऊर्जा के क्षेत्र में आत्मनिर्भरता की ओर एक कदम और बढ़ा दिया है। स्वतंत्रता दिवस से एक दिन पहले गुरुवार को पतरातू के थर्मल पावर प्लांट की पहली यूनिट से 800 मेगावाट का बिजली उत्पादन शुरू हो गया। सारी बिजली कटिया ग्रिड के माध्यम से हटिया-2, बुढ़मू, ललपनिया और पीजीसीआईएल ग्रिड को दी गई। ललपनिया ग्रिड से यह बिजली गोविंदपुर और संथाल परगना को दी जा रही है। अब कॉमर्शियल उत्पादन के लिए ईस्टर्न रीजन पावर काउंसिल को आवेदन दिया जाएगा। वहां से मंजूरी मिलने के बाद झारखंड बिजली वितरण निगम लिमिटेड से बिलिंग शुरू हो जाएगी, जो करीब तीन रुपए प्रति यूनिट होगी। झारखंड अभी बिजली के लिए सेंट्रल सेक्टर पर निर्भर है। अभी औसतन 2000 से 2400 मेगावाट बिजली की जरूरत है। इनमें से करीब 1300 मेगावाट बिजली सेंट्रल सेक्टर से ली जाएगी। अगले साल से यहां से झारखंड को मिलेगी 1960 मेगावाट बिजली पतरातू सुपर थर्मल पावर प्लांट से कुल 4000 मेगावाट बिजली का उत्पादन होना है। पहले फेज में 800-800 मेगावाट की तीन यूनिट से अगले साल बिजली उत्पादन शुरू होगा। इनमें से 80 फीसदी यानी 1960 मेगावाट बिजली झारखंड को मिलने लगेगी। इससे राज्य को सेंट्रल सेक्टर से बिजली लेने की जरूरत नहीं पड़ेगी। क्योंकि झारखंड के टीवीएनएल, सिकिदरी हाइडल, आधुनिक पावर, इनलैंड पावर और पतरातू प्लांट से मिलने वाली बिजली ही राज्य के लिए पर्याप्त होगी। वहीं डीवीसी पर निर्भरता भी खत्म हो जाएगी। इससे डीवीसी कमांड एरिया वाले धनबाद, बोकारो, रामगढ़, हजारीबाग, देवघर, गिरिडीह और कोडरमा को भी बिजली देने में जेबीवीएनएल सक्षम हो जाएगा। यही नहीं, पीक ऑवर में भी झारखंड के पास बिजली की कोई कमी नहीं रहेगी। झारखंड में अभी बिजली की स्थिति 750 मेगावाट का सोलर प्लांट भी लगेगा: टीवीएनएल का विस्तारीकरण भी होने वाला है। यहां टीटीपीएस परिसर में 50 मेगावाट का सोलर पावर प्लांट लगाया जाएगा। वहीं गेतलसूद डैम के फ्लोटिंग सोलर प्लांट से भी 100 मेगावाट बिजली उत्पाद होगा। इसके अलावा चांडिल डैम में भी 600 मेगावाट का सोलर पावर प्लांट लगेगा। इससे झारखंड में सरप्लस बिजली होगी।


