अमृतसर के कस्बा छेहरटा स्थित गुरुद्वारा छेहरटा साहिब में बसंत पंचमी का विश्व प्रसिद्ध मेला शुरू हो गया है। धुंध और ठंड के बावजूद हजारों श्रद्धालुओं ने पवित्र सरोवर में आस्था की डुबकी लगाई। यहां की मान्यता है कि इस सरोवर में स्नान करने से न केवल आत्मा शुद्ध होती है, बल्कि पुत्र प्राप्ति की इच्छा भी पूरी होती है। गुरुद्वारा साहिब के मैनेजर हरजीत सिंह के अनुसार, मेले की तैयारियां एक सप्ताह पहले से शुरू कर दी गईं थीं। श्रद्धालुओं के ठहरने के लिए विशेष प्रबंध किए गए हैं। बसंत पंचमी के अवसर पर पूरे गुरुद्वारा परिसर को पीले रंग की पतंगों और फूलों से सजाया गया है। गुरु का लंगर 24 घंटे चल रहा है, जिसमें खिचड़ी, कढ़ी, पकौड़े के साथ-साथ जलेबी और गन्ने के रस से बनी खीर का विशेष प्रसाद वितरित किया जा रहा है। सरोवर में स्नान से होती है संतान प्राप्ति स्थानीय श्रद्धालु दंपती सुखबीर सिंह और सरबजीत कौर ने बताया कि परंपरा के अनुसार संतान प्राप्ति की इच्छा रखने वाले दंपती बसंत पंचमी पर सुबह सरोवर में डुबकी लगाकर अरदास करते हैं। कई महिलाएं लगातार 12 या 21 पंचमियों तक यहां स्नान करती हैं। मन्नत पूरी होने पर श्रद्धालु बैंड-बाजे के साथ शुक्राना करने आते हैं। देश-विदेश से आने वाले श्रद्धालु हर हिंदी महीने की पांचवीं तिथि को विशेष रूप से गुरुद्वारा साहिब में माथा टेकने आते हैं। गुरुद्वारा साहिब के बाहर ग्रांउड में पतंगबाजी के शौकीन युवाओं की ओर से पतंगबाजी की प्रतियोगिताएं भी आयोजित भी की जाती है। पतंगबाजी की प्रतियोगिता देखने के लिए भी युवा बड़ी संख्या में ग्राउंड में पहुंचते हैं। बसंत पंचमी को वसंत पंचमी और सरस्वती पंचमी के नाम से भी जाना जाता है। बसंत ऋतु की शुरुआत बता दें कि, बसंत पंचमी से बसंत ऋतु की शुरुआत हो जाती है और यह दिन माता सरस्वती को समर्पित किया गया है। मां सरस्वती को विद्या, ज्ञान, कला और संगीत की देवी मानी जाती हैं। इस बार बसंत पंचमी बहुत ही खास मानी जा रही है क्योंकि 144 साल बाद इस दिन महाकुंभ का चौथा शाही स्नान होने जा रहा है। जिसके कारण इस दिन माता सरस्वती का आशीर्वाद भी प्राप्त होगा।


