अमृतसर की एक युवती सिंगापुर स्टडी बेस वीजा लगवाने के चक्कर में ठगी का शिकार हो गई। एक एजेंट ने उसे विदेश भेजने का झांसा देकर 7.5 लाख रुपए ठग लिए और फर्जी वीजा पकड़ा दिया। जब युवती सिंगापुर पहुंची तो इमिग्रेशन जांच में वीजा फर्जी निकला और वहां की पुलिस ने उसे अगले ही दिन डिपोर्ट कर दिया। पीड़िता के मुताबिक, गोल्डन गेट के पास स्थित एजेंट के पास उन्होंने डेढ़ साल पहले फाइल लगवाई थी। फाइल लगवाने के बाद लगातार उन्हें चक्कर लगवाए गए और फिर वीजा दे दिया गया। फिर जब टिकट की बात की तो फिर से उसे चक्कर लगवाए जाते। जिसके बाद उन्होंने पुलिस में शिकायत की। युवती को फर्जी वीजा थमाया पीड़िता सिमरजीत कौर निवासी रजधान ने बताया कि शुरुआत में उनसे 5.50 लाख रुपए लेकर नकली वीजा दिया। जब उसने मामले की शिकायत पुलिस से की, तो पुलिस ने मामला दबाकर एजेंट के साथ समझौता करवा दिया। पुलिस ने कहा कि उन्हें एक मौका दिया जाए और वो इस बार उन्हें सिंगापुर भेज देंगे। मार्च में उनका राजीनामा हुआ था। जिसके बाद 13 नवंबर को उन्हें सिंगापुर भेजा गया था। वहां जाकर उन्हें समझ आया कि उनका वीजा नकली है। सिंगापुर इमिग्रेशन ने नकली वीजा देखते ही युवती को हिरासत में लिया और अगले दिन वापस भारत भेज दिया। एजेंट ने फोन उठाना बंद किया लड़की ने बताया कि उसने वहां पहुंच कर कई बार एजेंट को फोन किया लेकिन उसने फोन उठाना बंद कर दिया। वहां भी उनकी जान पहचान वाला कोई नहीं था जिससे मदद मांगी जा सकती। पहले एजेंट ने 5.50 लाख लिए थे, फिर से वीजा के लिए 2 लाख और ले लिए। पीड़िता रंगरेटे सिंह सभा पंजाब के सदस्यों जोगा सिंह वडाला के साथ SSP अमृतसर (देहात) के ऑफिस पहुंची और एजेंट के खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग की। सभा के सदस्यों ने बताया कि गोल्डन गेट स्थित जीके टूर एंड ट्रैवल में रवींद्र सिंह ने उनके साथ ठगी की। पुलिस ने भी उनका साथ दिया क्योंकि तभी उसने दुबारा से उसे नकली वीजा थमा दिया। उन्होंने कहा कि अगर पंजाब पुलिस ने समय पर सही कार्रवाई की होती, तो युवती को यह मुसीबत न झेलनी पड़ती। SSP देहात कासिम मीर ने इस मामले में उन्हें आश्वासन दिया कि मामले की निष्पक्ष जांच कर एजेंट के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी।


