अमृतसर स्थित श्री दरबार साहिब में 350 साला शहीदी शताब्दी के उपलक्ष्य पर हेड ग्रंथी और पूर्व श्री अकाल तख्त साहिब के जत्थेदार ज्ञानी रघबीर सिंह ने मीडिया को संबोधित किया। उन्होंने कहा कि यह दिवस श्री गुरु तेग बहादुर जी की महान शहादत को स्मरण करने और उनकी मानवता, त्याग और धार्मिक स्वतंत्रता की शिक्षाओं को जन-जन तक पहुंचाने का दिन है। उन्होंने संगत को गुरु साहिब की शहादत के महत्व और उनके सार्वभौमिक संदेश के बारे में प्रेरणादायक विचार साझा किए। उन्होंने कहा कि आज का दिन पूरी मानवता के लिए अत्यंत पवित्र है, क्योंकि लगभग 350 वर्ष पहले इसी दिन श्री गुरु तेग बहादुर साहिब जी ने धार्मिक स्वतंत्रता, मानव अधिकार और सत्य की रक्षा के लिए अपनी शहादत दी थी। 12 बजे सारी संगत एक बार जपुजी साहिब का पाठ जरूर करें उन्होंने बताया कि गुरु साहिब ने न केवल हिंदू धर्म की रक्षा की, बल्कि अन्याय और अत्याचार के विरुद्ध एक अडिग खड़े होकर संसार को अद्वितीय साहस का संदेश दिया। ज्ञानी रघबीर सिंह ने संगत को प्रेरित किया कि दोपहर लगभग 12 बजे सारी संगत एक बार जपुजी साहिब का पाठ जरूर करें। यह पाठ गुरु तेग बहादुर साहिब जी के चरणों में हमारी प्रणाम भेंट है। पवित्र शहर घोषित करने का प्रस्ताव पेश अपने संदेश में उन्होंने यह भी बताया कि पंजाब सरकार द्वारा श्री अमृतसर, श्रीआनंदपुर साहिब और तख्त श्री दमदमा साहिब वाले शहरों को पवित्र शहर घोषित करने का प्रस्ताव पेश किया गया है। उन्होंने कहा कि यदि यह दर्जा दिया जाता है तो इन पवित्र स्थलों के आसपास अनुचित दुकानों और नशे से संबंधित गतिविधियों पर रोक लगेगी और इन शहरों की गरिमा तथा पवित्रता बनी रहेगी। इस कदम के लिए उन्होंने पंजाब सरकार की खुले तौर पर सराहना करते हुए कहा कि यह निर्णय सिख पंथ की लंबे समय से चली आ रही मांग को पूरा करने वाला और अत्यंत स्वागतयोग्य पहल है। उन्होंने संगत से अपील की कि हम सभी गुरु साहिब की शिक्षाओं साहस, त्याग और मानवता को अपने जीवन में अपनाए और इन पवित्र स्थानों की मर्यादा बनाए रखने में अपना योगदान दें।


