1984 के सिख कत्लेआम से जुड़े मामलों में कांग्रेस नेता सज्जन कुमार को बरी किए जाने के फैसले पर गहरा रोष और दुख व्यक्त किया गया है। शिरोमणि गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी के प्रधान एडवोकेट हरजिंदर सिंह धामी ने इस फैसले को पीड़ित परिवारों के साथ गंभीर अन्याय करार दिया है। उन्होंने कहा कि यह निर्णय उन परिवारों के जख्मों को फिर से हरा करने वाला है, जो पिछले करीब 41 वर्षों से इंसाफ की आस लगाए बैठे हैं। एडवोकेट धामी ने जारी बयान में कहा कि अदालत के इस फैसले ने पीड़ित परिवारों को मानसिक रूप से गहरी ठेस पहुंचाई है। नवंबर 1984 का सिख कत्लेआम इतिहास का एक ऐसा काला अध्याय है, जिसमें सरकारी संरक्षण में निर्दोष सिखों को बेरहमी से निशाना बनाया गया। उस दौरान सैकड़ों सिखों की हत्या की गई, घरों और गुरुद्वारों को जलाया गया और पूरे समुदाय को भय के साए में जीने पर मजबूर कर दिया गया। पहले से सजा काट रहा है सज्जन कुमार उन्होंने कहा कि सिख संस्थाएं और पीड़ित परिवार पिछले चार दशकों से लगातार न्याय की लड़ाई लड़ रहे हैं। इतने लंबे संघर्ष के बाद भी दोषियों को सजा न मिलना न केवल पीड़ितों के साथ अन्याय है, बल्कि न्याय व्यवस्था पर भी गंभीर सवाल खड़े करता है। एडवोकेट धामी ने स्पष्ट कहा कि सज्जन कुमार दिल्ली सिख कत्लेआम का दोषी है और वह पहले भी एक मामले में सजा काट रहा है। इसके बावजूद अन्य मामलों में उसका बरी हो जाना बेहद निराशाजनक और पीड़ादायक है। शिरोमणि कमेटी प्रधान ने कहा कि इस तरह के फैसले पीड़ितों की उम्मीदों को तोड़ते हैं और पूरे सिख समुदाय को गहरी पीड़ा देते हैं। उन्होंने मांग की कि सरकार और न्यायपालिका इस मामले पर गंभीरता से पुनर्विचार करें और 1984 के दोषियों को कड़ी से कड़ी सजा दी जाए, ताकि पीड़ित परिवारों को वास्तविक इंसाफ मिल सके और भविष्य में ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति न हो।


