अमृतसर से 328 पावन स्वरूप मामला:एसजीपीसी का बड़ा ऐलान, अकाल तख्त आदेश सर्वोपरि, पुलिस-सरकार को सहयोग नहीं, आप नेताओं पर निशाना साधा

अमृतसर से शिरोमणि गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी (एसजीपीसी) ने श्री गुरु ग्रंथ साहिब जी के 328 पावन स्वरूपों से जुड़े मामले में अपना रुख स्पष्ट करते हुए कहा है कि वह श्री अकाल तख्त साहिब के आदेशों के अनुसार ही कार्य कर रही है और इस प्रकरण में पुलिस प्रशासन या सरकार को किसी प्रकार का सहयोग अथवा रिकॉर्ड उपलब्ध नहीं करवाएगी। यह जानकारी एसजीपीसी सचिव प्रताप सिंह की अगुआई में हुई अधिकारियों की बैठक के बाद जारी बयान में दी गई। प्रताप सिंह ने कहा कि इस मामले में जिन कर्मचारियों पर दोष सिद्ध हुआ था, उनके खिलाफ श्री अकाल तख्त साहिब की जांच रिपोर्ट के आधार पर शिरोमणि कमेटी पहले ही कार्रवाई पूरी कर चुकी है। उन्होंने स्पष्ट किया कि श्री अकाल तख्त साहिब का आदेश सिख संस्था के लिए सर्वोपरि और अंतिम है, जिसके तहत किसी भी सरकारी एजेंसी को सहयोग नहीं दिया जा सकता। दोषी कर्मचारियों पर अकाल तख्त की रिपोर्ट के आधार पर हो चुकी है सख्त कार्रवाई उन्होंने बताया कि पावन स्वरूपों की भेंट को निजी स्वार्थ के लिए उपयोग करने और रिकॉर्ड में हेरफेर करने के आरोप में तीन कर्मचारी कंवलजीत सिंह, बाज सिंह और दलवीर सिंह सीधे तौर पर दोषी पाए गए थे। शिरोमणि कमेटी के नियमों के अनुसार पावन स्वरूप केवल निर्धारित प्रक्रिया के तहत ही संगत या गुरुद्वारा समितियों को दिए जाते हैं, जिसमें जांच, सिफारिश, रसीद और विधिवत रिकॉर्ड शामिल होता है। संबंधित कर्मचारियों द्वारा इस प्रक्रिया की अनदेखी की गई, जिस कारण उनके खिलाफ सख्त कार्रवाई की गई। राजनीतिक बयानों पर आपत्ति प्रताप सिंह ने कहा कि शिरोमणि गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी पूरी सिख कौम की अपनी संस्था है और इसके खिलाफ किया जा रहा झूठा प्रचार सिखों की एक गौरवशाली संस्था को नुकसान पहुंचाने वाला है। उन्होंने कहा कि आम आदमी पार्टी के नेता सरदार बलतेज पन्नू मीडिया से बात करते समय इस बात का ध्यान नहीं रख रहे कि उनके बयान किसी भी तरह से तर्कसंगत नहीं हैं। मनमानी और निराधार बयानबाजी से सिख संस्थाओं की परंपराओं और गरिमा को गंभीर ठेस पहुंच रही है। उन्होंने स्पष्ट किया कि श्री गुरु ग्रंथ साहिब जी के पावन स्वरूप संगत को निर्धारित नियमों और मर्यादाओं के अनुसार ही प्रदान किए जाते हैं। आप नेता द्वारा यह कहना कि शिरोमणि कमेटी के प्रधान के पास पावन स्वरूपों से संबंधित कोई डायरी है, पूरी तरह भ्रामक है और संगत में गलतफहमी पैदा करने वाला दावा है। उन्होंने कहा कि इस तरह की किसी भी डायरी या परची से संबंधित कोई व्यवस्था या प्रावधान अस्तित्व में नहीं है, जैसा कि प्रचारित किया जा रहा है। शिरोमणि कमेटी ने सरकार से अपील की कि वह इस संवेदनशील मामले में सिख संस्थाओं को निशाना बनाने से बचे और श्री अकाल तख्त साहिब के आदेशों का सम्मान करे।

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