जिले में केंद्र सरकार की मनरेगा योजना के तहत तहत अलग-अलग पंचायतों में 28 अमृत सरोवर बनाए गए थे, पर इन में से 20 में बूंद भर भी पानी नहीं है। इन 28 सरोवरों को बनाने में करीब 4 करोड़ खर्च हो चुका है, लेकिन कहीं भी मापदंड के मुताबिक कार्य नहीं किया गया है, बस गड्ढा खोदकर छोड़ दिया है। केंद्र के अमृत सरोवर बनाने के उद्देश्यों को पंचायतों ने पूरा नहीं किया। कहीं बोल्डर पिचिंग नहीं की तो कहीं पौधे नहीं लगाए। इन सरोवरों से गांव का वाटर लेवल कम नहीं होने का दावा किया गया था पर ऐसा कुछ हुआ नहीं। इस तरह के बनाए गए सरोवरों में प्रत्येक में लगभग 20 लाख का खर्च आया है। यहां के अमृत सरोवर में आज तक कभी पानी नहीं भरा। बच्चे इसमें साइकिल चलाते हैं और कंचे खेलते हैं।


