अमेरिका के इमिग्रेशन अधिकारियों ने सोमवार रात एक भारतीय छात्र बदर खान सूरी को वर्जीनिया से गिरफ्तार किया है। सूरी पर अमेरिका में हमास के समर्थन में प्रोपेगैंडा फैलाने का आरोप है। अमेरिकी सरकार विदेश नीति का विरोध करने वाले छात्र कार्यकर्ताओं पर कार्रवाई कर रही है। सूरी को भी इसी के तहत गिरफ्तार किया गया है। सूरी पर इजराइल का विरोध करने का आरोप है। बदर सूरी स्टूडेंट एक्सचेंज प्रोग्राम के तहत अमेरिका की जॉर्जटाउन यूनिवर्सिटी का छात्र है। वह सेंटर फॉर मुस्लिम-क्रिश्चियन अंडरस्टैंडिंग में पोस्ट डॉक्टोरल फैलो के रूप में पढाई कर रहा है। अमेरिकी गृह सुरक्षा विभाग में सहायक सचिव ट्रिशिया मैकलॉघलिन ने X पर पोस्ट कर आरोप लगाया कि सूरी सक्रिय तौर पर हमास का प्रचार कर रहा था। वह सोशल मीडिया पर यहूदी विरोधी भावना को बढ़ावा दे रहा था। उसे अमेरिका से निर्वासित किया जा सकता है। फिलिस्तीन से है बदर सूरी की पत्नी
सूरी की पत्नी मफज सालेह फिलिस्तीनी हैं। सूरी 2011 में लोगों की मदद के लिए गाजा पहुंचे थे, इस दौरान दोनों की मुलाकात हुई थी। मफज ने नई दिल्ली में जामिया यूनिवर्सिटी से पोस्ट ग्रेजुएशन किया है। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक मफज सालेह को भी जल्द ही डिपोर्ट किया जाएगा। सोमवार को उन्हें उनके वाशिंगटन डीसी स्थित घर से लुइसियाना ट्रांसफर कर दिया गया है। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक मफज के पिता अहमद यूसुफ हमास से जुड़े हुए हैं, जिसे अमेरिका ने एक आतंकवादी संगठन घोषित कर रखा है। जॉर्जटाउन यूनिवर्सिटी ने सूरी के बेगुनाह होने का दावा किया है और खुली जांच का समर्थन किया है। सूरी के वकील ने भी हिरासत की निंदा की है। हमास का समर्थन करने पर भारतीय छात्रा का वीजा रद्द
अमेरिका की कोलंबिया यूनिवर्सिटी में पढ़ रही भारतीय छात्रा रंजनी श्रीनिवासन का इसी महीने वीजा रद्द कर दिया गया था। श्रीनिवासन पर आरोप था कि वो ‘हिंसा-आतंकवाद को बढ़ावा देने’ और हमास का समर्थन करने वाली गतिविधियों में शामिल थीं। वीजा रद्द होने के बाद रंजनी अमेरिका छोड़ चुकी हैं। अमेरिकी गृह सुरक्षा विभाग (DHS) के मुताबिक रंजनी को F-1 स्टूडेंट वीजा के तहत कोलंबिया यूनिवर्सिटी के अर्बन प्लानिंग में PhD करने के लिए एडमिशन मिला था। अमेरिकी विदेश विभाग ने 5 मार्च को उनका वीजा निरस्त कर दिया था। इसके बाद रंजनी ने 11 मार्च को अमेरिका छोड़ दिया। DHS की सचिव क्रिस्टी नोएम ने कहा कि अगर कोई इंसान हिंसा और आतंकवाद का समर्थन करता है, तो उसे इस देश में रहने की इजाजत नहीं दी जानी चाहिए। ट्रम्प प्रशासन ने कोलंबिया यूनिवर्सिटी को 33 अरब रुपए की मदद रोकी ट्रम्प प्रशासन ने मार्च की शुरुआत में कोलंबिया यूनिवर्सिटी का 400 मिलियन डॉलर (करीब 33 अरब रुपए) का अनुदान रद्द कर दिया था। यूनिवर्सिटी पर यहूदी छात्रों का उत्पीड़न रोकने में नाकाम रहने का आरोप था। अमेरिकी शिक्षा विभाग, स्वास्थ्य एवं मानव सेवा विभाग, जस्टिस डिपार्टमेंट और सामान्य सेवा प्रशासन की जॉइंट टास्क फोर्स टु कॉम्बैट एंटी-सेमिटिज्म ने यह कार्रवाई की। राष्ट्रपति ट्रम्प ने यहूदी छात्रों की सुरक्षा करने में नाकाम रहने और विरोध-प्रदर्शनों की इजाजत देने वाली यूनिवर्सिटीज को फेडरल ग्रांट (संघीय वित्तीय सहायता) न देने की चेतावनी दी है। कोलंबिया यूनिवर्सिटी ज्यूडिशियल बोर्ड ने गाजा को लेकर हुए विरोध-प्रदर्शन के दौरान हैमिल्टन हॉल पर कब्जे में शामिल छात्रों पर सख्त कार्रवाई की है। फिलिस्तीनी छात्रा और प्रदर्शनकारी गिरफ्तार अमेरिकी इमिग्रेशन विभाग के अधिकारियों ने इसी महीने वेस्ट बैंक की एक फिलिस्तीनी छात्रा लेका कोर्डिया और फिलिस्तीनी महमूद खलील कार्यकर्ता को गिरफ्तार किया था। लेका 2022 से एक्सपायर स्टूडेंट वीजा पर अमेरिका में रह रही थीं। लेका कोर्डिया को इससे पहले अप्रैल 2024 में भी हमास समर्थक प्रदर्शनों में शामिल होने की वजह से गिरफ्तार किया गया था। ———————- अमेरिका से जुड़ी ये खबर भी पढ़ें… अमेरिकी उपराष्ट्रपति का ग्रीनकार्ड होल्डर्स पर बयान:वेंस बोले- उन्हें हमेशा रहने का हक नहीं, सरकार देश से बाहर निकाल सकती है अमेरिकी उपराष्ट्रपति जेडी वेंस ने ग्रीन कार्ड होल्डर्स पर बयान देते हुए कहा कि उन्हें हमेशा अमेरिका में रहने का हक नहीं है। एक टीवी चैनल को दिए इंटरव्यू में वेंस ने कहा ग्रीन कार्ड रखने का मतलब यह नहीं है कि किसी व्यक्ति को अमेरिका में हमेशा रहने का अधिकार मिल जाता है। पूरी खबर यहां पढ़ें…


