गुलाबीनगरी में आए 21 अमेरिकी टूरिस्ट्स ने गुरुवार को राजरासा रेस्तरां में राजस्थानी व्यंजनों की परंपरागत शैली में खाना बनाना सीखा। वर्ल्डवाइड एडवेंचर ट्रैवल कंपनी की ओर से आयोजित इस एक्टिविटी ने विदेशी मेहमानों को राजस्थान की किचन कल्चर से रूबरू कराया। करीब एक घंटे चली इस एक्टिविटी में टूरिस्ट्स ने न सिर्फ राजस्थान की पुरानी पाक कला तकनीकों को जाना, बल्कि खुद अपने हाथों से दाल-बाटी, नागौरी कोरमा (मुगलकालीन डिश), जिमीकंद के फुले और बेजड़ की रोटी जैसी डिशेज बनाईं। वहीं, सिलबट्टे पर लहसुन, काचरी और लाल मिर्च की चटनी पीसने का अनुभव भी लिया। खाना बनाने के दौरान गाय का घी, कच्ची घानी का तेल और डली वाला नमक इस्तेमाल किया गया, ताकि उन्हें प्रामाणिक देसी स्वाद का अनुभव मिल सके। सभी विदेशी मेहमानों ने अंत में खुद के बनाए व्यंजनों का आनंद भी लिया। शेफ सौरभ और शेफ प्रतीक ने इस पूरे सत्र को लीड किया और अपने अनुभव टूरिस्ट्स से साझा किए। उन्होंने बताया कि विदेशी मेहमानों के लिए यह अनुभव बिल्कुल नया था और उन्होंने राजस्थान की रसोई को बहुत ही रोचक पाया। राजरासा रेस्तरां के एमडी आदित्य अग्रवाल ने कहा कि विदेशी पर्यटक अक्सर यहां सिर्फ राजस्थानी खाने का स्वाद लेने नहीं आते, बल्कि हमारे किचन के पारंपरिक अंदाज को भी समझना चाहते हैं। जनवरी 2025 से हम इस तरह की एक्टिविटी लगातार कर रहे हैं और इसका उद्देश्य राजस्थान की पाक परंपरा को वर्ल्ड प्लेटफॉर्म पर प्रस्तुत करना है।


