राजस्थान के जालोर में आज संसद भवन की तरह दिखने वाली एक खास स्कूल बिल्डिंग का उद्घाटन होगा। ये बिल्डिंग अमेरिकी एनआरआई डॉक्टर अशोक जैन ने बनवाई है। जिले के दादाल गांव में करीब 7 करोड़ की लागत से ये मॉडर्न फैसिलिटी वाली बिल्डिंग बनी है। इसी स्कूल में डॉक्टर अशोक जैन ने शुरुआती पढ़ाई की थी। करीब 6 साल पहले स्कूल के प्रिंसिपल ने उनसे यहां एक कमरा बनवाने की गुजारिश की थी। ये बात उन्होंने अपनी मां को बताई तो उन्होंने पूरी बिल्डिंग बनवाने का सुझाव दिया था। इसी स्कूल में पेड़ के नीचे बैठकर पढ़े अशोक जैन कहते हैं- मैं 31 साल से अमेरिका में रह रहा हूं। 1972 से 1975 के दौरान क्लास 1 से लेकर 3 तक मैं दादाल गांव की इसी स्कूल में पढ़ा था। उस वक्त भी कमरे नहीं थे, पेड़ के नीचे बैठकर पढ़ते थे। इसके बाद पिता बेंगलुरु चले गए तो हम भी उनके साथ शिफ्ट हो गए। पिता ने वहां स्टेनलेस स्टील का काम शुरू किय। आगे की पढ़ाई वहीं हुई। इसके बाद MBBS करने 1994 में अमेरिका चला गया था। प्रिंसिपल ने कहा था- एक कमरा बनवा दीजिए अशोक जैन कहते हैं- जब भी इंडिया आता हूं, गांव का चक्कर जरूर लगाते हैं। बात 2020 की है। 26 जनवरी 2020 को स्कूल के कार्यक्रम में मुझे बुलाया गया था। उस वक्त प्रिंसिपल ने बताया कि आप ने यहां से पढ़ कर इतना दूर तक का सफर तय किया है। स्कूल भवन के सभी कमरे जर्जर हैं। इस लिए सभी बच्चों को आज भी स्कूल के ग्राउंड़ में बैठ कर पेड़ों के नीचे पढ़ना पड़ रहा है। अगर संभव हो तो एक स्कूल बना कर दे दीजिए। ताकि सर्दियों या बारिश के मौसम में पढ़ाई सुचारू चल सके। मां बोलीं- एक कमरे से क्या होगा, तुम तो स्कूल बनवाओ अशोक कहते हैं- मैंने उन्हें तुरंत हां कर दी और घर जा कर सबसे पहले अपनी मां को बताया कि मेरी स्कूल में इस तरह का घटनाक्रम चल रहा है। अब एक कमरा बना कर देना है। ऐसे में, मां ने सलाह दी- एक रूम से क्या होगा। इतने सारे बच्चे हैं। तुम तो स्कूल ही बना कर दो। इसके बाद मैंने इस बारे में अपने बड़े भाई जीतमल जैन से बात की तो उन्होंने खुश होते हुए कहा कि एक स्कूल बना देते हैं, मां की बात एकदम सही है। पत्नी ने याद दिलाया तो शुरू हुआ काम अशोक कहते हैं- इसके बाद कोरोना काल चला तो कुछ चीजें संभव नहीं हो पाई। 2022 में मां का निधन हो गया। मैं परिवार के साथ फिर से भारत लौटा तो गांव आया। इस दौरान पत्नी ने कहा- शिक्षा सबसे बड़ा दान है और ये एकदम सही समय है कि हम स्कूल बनाने का काम शुरू कर दें। 47 साल से बच्चे पेड़ के नीचे बैठकर पढ़ रहे हैं। यह शिक्षा का स्तर नहीं है, इसे सुधारना होगा। जैन कहते हैं- परिवार से स्कूल की प्लानिंग को लेकर चर्चा हुई तो संसद भवन का आइडिया दिमाग में आया। राउंड शेप की बिलिंग बनाई जाए जिसमें देश का भविष्य पढ़ेगा और निखरेगा तो मेरी तरह राजस्थान का नाम भी होगा। राजपूत समाज ने दान दी जमीन अशोक कहते हैं- इसके बाद माता-पिता की स्मृति में 7 करोड़ की लागत से संसद भवन जैसा स्कूल बनाने की शुरुआत की। जमीन कम होने से जमीन खरीदने के लिए गांव के राजपूत समाज के मलसिंह के पास गए। उन्होंने जमीन बेचने से मना कर दिया। उन्होंने कहा- हम जमीन कभी नहीं बेचते हैं लेकिन आप गांव के लिए स्कूल बनाना चाहते हैं तो हम अपनी ओर से स्कूल के लिए जमीन दान दे देते हैं। उसके बाद उनके पुत्र भंवर सिंह, बलवंत सिंह व शैल सिंह ने स्कूल के आगे की 3 बीघा जमीन स्कूल को दान दी। इसके बाद स्कूल की जमीन समेत कुल 5 एकड़ जमीन हो गई। 2023 में स्कूल का निर्माण कार्य शुरू किया। स्कूल के निर्माण कार्य की पुरी देखरेख उनके बड़े भाई जीतमल जैन ने की। और अब स्कूल भवन बनकर तैयार हुआ हैं। आज इसका उद्घाटन होगा। पूरा गांव इसे एक उत्सव के रूप में मनाएगा। स्कूल में सुविधाएं बढ़ी स्कूल के बारे में बात करते हुए जैन बताते हैं- जिला मुख्यालय को छोड़कर अन्य किसी भी जगह राजकीय विद्यालयों में विज्ञान संकाय नहीं हैं। इसलिए इस स्कूल में विज्ञान और कंप्यूटर की दो लैब भी तैयार की गई है। इसके अलावा, इलेक्ट्रिकल, प्लंबिंग, गारमेंट, माइक्रो इरिगेशन और कंप्यूटर जैसे कौशल विकास प्रशिक्षण भी उपलब्ध कराए जाएंगे। बच्चों के शारीरिक विकास के लिए वॉलीबॉल, बास्केटबॉल, बैडमिंटन, फुटबॉल, क्रिकेट, कबड्डी और एथलेटिक्स जैसी खेल सुविधाएं भी मौजूद रहेंगी। इसके साथ स्कूल के सामने एक ओपन जिम है। इस भवन में 22 से अधिक टायलेट व बाथरूम बनाए गए हैं। जिसमें बालिकाओं के लिए विशेष कर ध्यान रखा गया है। आज जालोर के बागोड़ा क्षेत्र के दादाल गांव में इस स्कूल के नए भवन का उद्घाटन है। राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) एवं सहकारिता विभाग व नागरिक उद्यान विभाग के मंत्री गौतम दक और विधानसभा मुख्य सचेतक जोगेश्वर गर्ग के इस स्कूल का उद्घाटन करेंगे।


