अरहर की बुआई दो-दो फीट की दूरी पर करें, इससे उत्पादन बढ़ेगा

गढ़वा | कृषि वैज्ञानिक डॉ. अशोक कुमार ने कहा है कि मौसम पूर्वानुमान अनुसार इस सप्ताह भी बादल छाए रहेंगे। परंतु कहीं-कहीं छिट-पुट वर्षा की संभावना है। दिन का अधिकतम तापमान जहां 31 से 34 डिग्री सेल्सियस के बीच रहने की संभावना है। वहीं रात का न्यूनतम तापमान 24- 25 डिग्री के बीच रह सकता है। वैसे तो खरीफ फसलों की बुवाई/ रोपाई का समय अब समाप्त हो रहा है, परंतु अभी भी यदि खेत खाली है, तो धान वाले खेतों में 120-125 दिन या इससे कम अवधि वाले प्रभेदों जैसे वंदना, अंजली, बिरसा विकास धान सहभागी धान, स्वर्ण शक्ति, अभिषेक आदि की ही रोपाई दो-तीन रोज के अंदर करना लाभप्रद होगा। रोपाई करने के समय बिचड़ों की संख्या बढ़ा दें: रोपाई में बिचड़ों की संख्या थोड़ी बढ़ा दें और दूरी घटाकर 10- 12 सेंटीमीटर रखना ठीक रहेगा। लंबी अवधि वाले प्रभेदों जैसे स्वर्णा, सांभा मंसूरी, राजश्री की रोपाई अब न करें। ऊंची जमीन(टांड़ एवं दोन 3) यदि खाली रह गया है, तो उसमें आज-कल में दलहन जैसे अरहर या कम अवधि वाले मूंग/उड़द की फसल लगा सकते हैं। अरहर एक ऐसी फसल है, जिसकी बुआई मई के अंत से सितंबर के शुरू तक की जा सकती है। इसकी बुआई में जैसे-जैसे देरी होती है वैसे-वैसे बीज दर बढ़ाते जाते हैं और लाइन से लाइन की दूरी घटाते जाते हैं। लाइन से बुआई करना लाभदायक मई के अंत से जून तक बीज दर प्रति कठ्ठा 300 ग्राम अनुसंसित है। परंतु जुलाई में 375, अगस्त में 450, और सितंबर में 550 ग्राम प्रति कठ्ठा बीज दर रखना उचित होगा। लाइन में यदि बुआई करते हैं तो लाइन से लाइन की दूरी मई -जून में 3 फीट, जुलाई में 2.5 फीट, अगस्त में 2 फीट और सितंबर में 1.5 फीट रखें। अरहर में आईपीए 203 या कम अवधि में तैयार होने वाला चाहते हों तो उपास, मूंग में एच यू एम 16, विराट या आईपीएम 2-3 व उड़द में बिरसा उड़द -1,डब्लू बी यू 109 जैसे प्रभेदों की बुआई कर सकते हैं।। सभी दलहनी फसलों की बुवाई के समय प्रतिकट्ठा 1.75 किलोग्राम डीएपी, 700 ग्राम एमओपी, 150 ग्राम बोरेक्स पाउडर, 400 ग्राम सल्फर पाउडर और 5 किलोग्राम चुना या डोलोमाइट का व्यवहार करें। बुआई पूर्व बीजों को किसी भी फफूंदनाशक जैसे कार्बेन्डाजिम 2 ग्राम प्रति किलोग्राम बीज की दर से जरूर उपचारित करें। आप खेती-किसानी से जुड़े किस विषय पर जानकारी चाहते हैं, वॉट्सएप नंबर 7482098079 पर सिर्फ मैसेज करें। डॉ. अशोक कुमार कृषि वैज्ञानिक कृषि ​िवज्ञान केंद्र

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