अरावली पर्वतमाला के संरक्षण और बदलाव का विरोध जगह-जगह हो रहा है। इस कड़ी में ग्रीनमैन नरपतसिंह राजपुरोहित ने अपने खून से राष्ट्रपति के नाम का ज्ञापन लिखा। बुधवार को बाड़मेर कलेक्टर टीना डाबी को ज्ञापन दिया। अरावली बचाओ जैसे स्लोगन भी लिखे। ज्ञापन में लिखा कि अरावली पर्वतमाला केवल पहाड़, नहीं हमारी हवा, पानी, वन्यजीव और आने वाली पीढ़ियों का जीवन आधार है। 100 मीटर के नाम पर हो रहे विनाश को रोका जाए। दरअसल, हाल ही में सर्वोच्च न्यायालय की एक व्याख्या के आधार पर 100 मीटर से कम ऊंचाई वाली पहाड़ियों को पहाड़ नहीं मानने की प्रवृत्ति सामने आई है। फॉरेस्ट सर्वे ऑफ इंडिया की रिपोर्ट के अनुसार- राजस्थान की 12,081 पहाड़ियों में से केवल 8.7 प्रतिशत ही 100 मीटर से ऊंची हैं। यदि यह नई व्याख्या लागू होती है, तो अरावली का लगभग 90 प्रतिशत हिस्सा कानूनी संरक्षण से बाहर हो जाएगा, जिससे खनन माफिया और रियल एस्टेट को खुली छूट मिल जाएगी। बुधवार को नरपत सिह खून से लिखी चिट्ठी लेकर जिला कलेक्ट्रेट पहुंचे, जिसे जिला कलेक्टर टीना डाबी को सौंपा। कलेक्टर ने महामहिम राष्ट्रपति तक पहुंचाने की बात कही। इस दौरान पेपर पर अरावली बचाओ स्लोगन भी साथ में थे। नरपत सिंह का कहना है- सुप्रीम कोर्ट की ओर से अरावली को लेकर जो व्याख्या की गई है। वो बहुत ही दुखदायी है। 100 मीटर के नीचे की पहाड़ी को अरावली भाग नहीं मानकर खनन के लिए देने की बात कही है। अगर इन पहाड़ियों में खनन हो गया तो राजस्थान का ऑक्सीजोन, राजस्थान की रीढ़ की हड्डी है। उन्होंने कहा- अरावली पहाड़ कटने से सैकड़ों की जिंदगियां बर्बाद हो जाएगी। अरावली के ईद-गिर्द जो जिले है वहां दिल्ली जैसे हालात हो जाएंगे। हमारी मांग है कि जो राजस्थान के ऑक्सीजन जोन को जस की तस स्थिति में रहने दिया जाए। उन्होंने कहा- यह चिट्ठी मैंने मेरे खून से नहीं अरावली के आंसुओं से लिखी हैं। अरावली को बचाया जाना चाहिए।


