अरावली न हो तो पाकिस्तान में बरसेगा राजस्थान का मानसून:1.50 लाख से ज्यादा पहाड़ियों पर खनन का खतरा, अब तक 25% चोटियां खत्म, पार्ट-2

सुप्रीम कोर्ट ने वन पर्यावरण मंत्रालय की समिति की सिफारिशों को स्वीकार करते हुए अरावली की पहाड़ियों की नई परिभाषा को मंजूरी दे दी है। इसके अनुसार दिल्ली से राजस्थान और गुजरात तक 700 किमी में फैली पहाड़ियां 100 मीटर से कम ऊंची हैं तो उन्हें अरावली में नहीं गिनेंगे। सुप्रीम कोर्ट ने आदेश में कहा है कि फिलहाल नए खनन की अनुमति नहीं है। लेकिन सच ये है कि अवैध खनन धड़ल्ले से हो रहा है। सुप्रीम कोर्ट की ही 2018 की CEC रिपोर्ट के मुताबिक राजस्थान में अब तक करीब 25% अरावली की पहाड़ियां नष्ट हो चुकी हैं। अकेले अलवर में 128 में से 31 पहाड़ियां समतल हो गई हैं। एक्सपट्‌र्स का कहना है कि अरावली नहीं हुई तो हमारी हिस्से के मानसून की बारिश पाकिस्तान में होगी। भास्कर ने अवैध खनन से छलनी नीमकाथाना, कोटपूतली, बानसूर, खेतड़ी में काम कर रहे पर्यावरणविदों से बात कर जाना नई परिभाषा से राजस्थान पर क्या असर पड़ेगा? 1048 चोटियां ही पूरी करती हैं 100 मीटर की शर्त नई परिभाषा की बात करें तो राजस्थान में मौजूद अरावली की 1.60 लाख चोटियों में से 1048 ही 100 मीटर की शर्त पूरी कर पाती हैं। ऐसे में 90% से ज्यादा पहाड़ियां अरावली के दायरे से बाहर हो जाएंगी। खनन माफिया के लिए नए रास्ते खुल जाएंगे। 700 किमी लंबी अरावली पहाड़ियों का करीब 80% हिस्सा राजस्थान के 27 जिलों में फैला हुआ है। खेती बाड़ी से लेकर किसानों की आय इन्हीं पहाड़ों पर निर्भर है। इसका प्रमुख कारण है कि चंबल, बनास, सहाबी, सोता, काटली, कासावती, गंभीरी और मोरेल जैसी बरसाती नदियां इसी अरावली से निकलती हैं। बारिश का पानी छोटे-छोटे नदी नालों और अंदरूनी शिराओं से बहते हुए सारा साल इन नदियों को भरा रखता है। यही पूर्वी राजस्थान में खेती की आधारशिला है। छोटी खेती और पशुपालन भी पूरी तरह इसी पर निर्भर है। सालाना 20 लाख लीटर प्रति हेक्टेयर रिचार्ज अरावली में पाए जाने वाले पेड़ पौधे और वनस्पति बहुत अलग किस्म के हैं। दुनिया की सबसे प्राचीन पर्वतमाला होने के कारण इसका पत्थर भी बहुत मजबूत है। इसमें पानी लंबे समय तक स्टोर कर सकने की क्षमता है। पूरे राजस्थान में पीने लायक पानी के करीब 32 ब्लॉक्स हैं। राजस्थान जैसे मरुस्थलीय क्षेत्र में पहले से ही करीब 22% अरावली की पहाड़ियां अत्यधिक खनन के चलते नष्ट हो चुकी हैं। एक रिपोर्ट के अनुसार अरावली की खास संरचनाएं सालाना 20 लाख लीटर प्रति हेक्टेयर भूमिगत जल रिचार्ज करती हैं, जो इस पूरे क्षेत्र में पानी का सबसे बड़ा स्रोत है। जंगल और जीव जंतुओं को भी खतरा राजस्थान विश्व विद्यालय के जियोलॉजी विभाग के प्रोफेसर महेश मीना का कहना है कि इन पहाड़ियों नें पाए जाने वाले वन्य जीव जंतुओं की अनोखी प्रजातियां, औषधीय पेड़ पौधे और दुर्लभ वनस्पति इस पर्वत शृंखला को विशेष बनाते हैं। राजस्थान में रणथंभौर, सरिस्का, मुकुंदरा, जवाई और झालाना जैसे अभ्यारण भी इन्हीं अरावली पहाड़ियों की देन है। ऐसे में अगर नई परिभाषा को देखते हुए इन अभ्यारणों को बचा पाना भी मुश्किल होगा। अरावली न हो तो हमारे मानसून की बारिश पाकिस्तान में बरसेगी राजस्थान विश्वविद्यालय के भूगोल विभाग के विभागाध्यक्ष डॉ चंद्र विजय ढाबरिया बताते हैं कि अरावली की पहाड़ियां ही राजस्थान में अच्छे मानसून और पूर्व की उपजाऊ जमीन का कारण है। बंगाल और अटेर सागर से आने वाला मानसून अरावली से टकरा कर पूरे प्रदेश में वर्षा करता है। इन पहाड़ियों की प्राकृतिक बनावट और घुमावदार संरचना के कारण मानसून इससे टकराकर यहां बारिश करता है। अगर ये न हों तो मानसून की अधिकतर बारिश पड़ोसी देश पाकिस्तान में हो और हम बारिश के लिए तरसें। धूल-प्रदूषण को बढ़ावा पर्यावरण के लिए 30 साल से संघर्ष कर रहे पर्यावरण व एंटी माइनिंग एक्टिविस्ट कैलाश मीना का कहना है कि अरावली पर्वत की 692 किमी लंबी ढाल राजस्थान, दिल्ली, उत्तर प्रदेश, हरियाणा को रेगिस्तान बनने से रोकती है। अरावली दिल्ली से आनी वाली खराब हवा और प्रदूषण को रोकती है। इसके अलावा अरावली नीमकाथाना, कोटपूतली, अलवर से उड़ने वाली डस्ट और जानलेवा कार्बन पार्टिकल को भी रोकती है। अरावली के पहाड़ नहीं होंगे तो हमारा हाल भी दिल्ली और भिवाड़ी की तरह होगा। कल पढ़िए : अरावली में अंधाधुंध खनन ने नदियों का गला घोंटा, 5 पंचायतों के 18 गांवों पर संकट …. अरावली हमारी लाइफ लाइन…सीरीज का ये पार्ट-1 भी पढ़िए… पीली हो जाएगी गुलाबी नगरी, बिना झीलों का उदयपुर:दिनभर धूल के तूफान, बिना मास्क सांस नहीं, AI से देखिए अरावली खत्म होने के खतरे राजस्थान से अरावली की पहाड़ियां खत्म हो गईं तो यहीं मजाक डरावनी हकीकत बनकर सामने आ सकता है। नई परिभाषा के बाद ‘पहाड़ियों को काटने वालों के लिए एक वैध हथियार’ बन जाएगी। पूरी खबर पढ़िए…

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