अरावली पर्वतमाला के संरक्षण को लेकर नाथद्वारा बार एसोसिएशन ने बुधवार को अरावली बचाओ अभियान के तहत उपखंड अधिकारी को राष्ट्रपति के नाम ज्ञापन सौंपकर विरोध दर्ज कराया। बार एसोसिएशन अध्यक्ष सूर्यप्रताप सिंह ने बताया कि अरावली पर्वत श्रृंखला के संबंध में सुप्रीम कोर्ट द्वारा लिए गए निर्णय को लेकर अधिवक्ताओं में गंभीर चिंता है। उन्होंने कहा कि अरावली कोई वस्तु नहीं है जिसे इंच-टेप से मापा जाए। यह विश्व की सबसे प्राचीन पर्वत श्रृंखलाओं में से एक है, जो गुजरात के पालनपुर से राजस्थान, हरियाणा और दिल्ली होते हुए रायसेना हिल तक फैली हुई है, जिसमें लगभग 80 प्रतिशत हिस्सा राजस्थान में आता है। उन्होंने बताया कि अरावली पर्वतमाला जनजीवन, वन्यजीव और पर्यावरण संतुलन का आधार है। चंबल और बनास जैसी महत्वपूर्ण नदियों का उद्गम भी अरावली से जुड़ा हुआ है। यदि अरावली का संरक्षण नहीं किया गया तो इसका दुष्प्रभाव न केवल राजस्थान बल्कि पूरे देश पर प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रूप से पड़ेगा। इसलिए बार एसोसिएशन ने अरावली को लेकर 100 मीटर की परिभाषा में संशोधन करने की मांग की है।


