बीजेपी सरकार ने 9 नए जिले समाप्त कर दिए हैं, जो पिछली कांग्रेस सरकार में बने थे। नए बने 17 में से 8 जिले (बालोतरा, ब्यावर, डीग, डीडवाना कुचामन, कोटपूतली-बहरोड़, खैरथल-तिजारा, फलौदी, सलूंबर ) यथावत रखें हैं। अलवर से बनाए गए गए बहरोड़ कोटपूतली व खैरथल-तिजारा भी शामिल हैं। ये दोनों जिले यथावत रखे गए हैं। कई महीनों से चल रही चर्चाओं को विराम भी मिल गया है। सबको लग रहा था कि खैरथल-तिजारा जिले को समाप्त किया जा सकता है। लेकिन ऐसा नहीं किया गया। प्रदेश की पॉलिटिक्स में अलवर का दबदबा दिखा नए जिलों को समाप्त करने के निर्णय में प्रदेश की राजनीति में अलवर का दबदबा साफ दिखता है। असल में दोनों नए जिलों को यथावत रख लिया गया। जबकि खैरथल-तिजारा को लेकर बराबर चर्चाएं चल रही थी कि इसे खत्म कर मर्ज किया जा सकता है। लेकिन ऐसा नहीं किया गया। इस निर्णय से आमजन को लग रहा है कि अलवर के नेताओं का प्रदेश की राजनीति में सीध दखल है। इस निर्णय से केंद्रीय मंत्री भूपेंद्र यादव व वन मंत्री संजय शर्मा का दबदबा झलकता है। सरकार ने नए जिले इसलिए खत्म किए सरकार के मंत्री ने शनिवार को बताया कि पूर्ववर्ती सरकार ने 20 नए जिला व तीन नए संभाग बनाए। चुनाव आचार संहिता से पहले नए जिले व संभाग बनाने की घोषणा व्यावहारिक नहीं थी। इसके मोटे मोटे कारण कमेटी ने प्राप्त किए हैं। इतने जिले की आवश्यकता होती तो इसका परीक्षण किया जाता। वित्तीय संसाधन की उपलब्धता देखी जाती। न पद सृजित किए। न कार्यालय भवन उपलब्धता सुनिश्चितता की। हमारी सरकार ने समिति बनाई। समिति ने पाया कि ये जिले व्यावहारिक नहीं है। ये जिले अनावश्यक भार डाल रहे हैं। इन जिलों की उपयोगिता बिल्कुल नहीं है। अभी नए संभाग की जरूरत भी नहीं है।


