केंद्रीय मंत्री भूपेंद्र यादव ने कहा कि अलवर के नेताओं की जल्दी दिल्ली में मीटिंग होगी। NHAI के प्रोजेक्ट को लेकर दिल्ली में वहां अधिकारी और जनप्रतिनिधियों से चर्चा होगी। ताकि एनएचएआई के प्रोजेक्ट तेजी से आगे बढ़े और विकसित भारत की सोच के साथ योजनाओं के कामों को पूरा कराया जा सके। यह बात केंद्रीय मंत्री भूपेंद्र यादव ने सोमवार को जिला परिषद के सभागार में आयोजित दिशा की मीटिंग के बाद मीडिया से कही। इस मीटिंग के बाद राजस्थान में नेता प्रतिपक्ष टीकाराम जूली ने कहा कि अलवर को NCR से बाहर करना चाहिए। जिसमें वन राज्य मंत्री व अलवर शहर के विधायक संजय शर्मा की भी सहमति है। केंद्रीय मंत्री भूपेंद्र यादव ने कहा कि अलवर से जुड़े NHAI के कामकाम को लेकर दिल्ली में अधिकारियों के साथ जल्दी मीटिंग करेंगे। ताकि कामकाज की रफ्तार आगे बढ़े। इसके अलावा ERCP ईआरसीपी की योजना में पानी को आगे लाने के काम पर आगे बढ़ेंगे। अलवर को स्वच्छ शहर के दायरे में आगे बढ़ाएंगे। योजनाओं को आगे बढ़ाकर विकसित भारत की कल्पना के साथ काम करेंगे। 60 से अधिक योजनाओं की समीक्षा की गई। 3 घंटे चली बैठक में सभी जनप्रतिनिधियों का सहयोग मिला। NCR से अलवर बाहर हो, यूनिवर्सिटी में भ्रष्टाचार भी नेता प्रतिपक्ष टीकाराम जूली ने कहा कि बैठक अच्छी रही। केंद्रीय मंत्री ने अधिकारियों को निर्देश दिए हैं। मैंने जिले में थ्री फेज बिजली नहीं मिलने, पेंशन समय पर नहीं मिलने, मिलावट वाली डेयरी को वापस शुरू करने , खेल स्टेडियम व कॉलेज का काम रुकने के अलावा डीएमएफडी के फंड को सही खर्च नहीं करने के मसले उठाए हैं। डीएमएफटी का फंड जहां से आता है उसका खर्च वहीं अधिक होना चाहिए। नगर पालिकाओं का स्ट्रैक्चर सैट हाेना चाहिए। एनसीआर से अलवर को निकालने की बात रखी है। इस पर वन मंत्री संजय शर्मा ने भी सहमति दी है। वैसे भी अलवर जिला दिल्ली एनसीआर से 100 किलोमीटर दूर है। लेकिन भारत सरकार ने रोक लगा रखी है। एनसीआर से अलवर को बाहर करना चाहिए। नेता प्रतिपक्ष ने कहा कि एनएचएआई की अच्छी कनेक्टिविटी पर चर्चा हुई है। पानी को लेकर अभी तक कोई बड़ा काम नहीं हुआ है। ईसरदा व नवनेरा पहले की कांग्रेस के समय काम हुए थे। अब 24 को निविदाएं होनी है। उसके बाद सरकार के काम का पता चलेगा। मीटिंग को होस्ट करने वाले सबकी मर्यादाओं को ध्यान रख कर काम कर रहे हैं तो अच्छा है। सब जनप्रतिनिधि जनता के कामकाज के लिए आते हैं। सबके काम होने चाहिए। ऐसा नहीं हो कि अगली मीटिंग में वही मुद्दे आ जाएं।


