अलवर में 12 हजार यूनिट ब्लड भी कम पड़ रहा:रोजाना 5 यूनिट थैलीसीमिया के मरीजों को चाहिए, स्वैच्छिक रक्तदान की अपील

अलवर जिला अस्पताल के अधीन संचालित ब्लड बैंक से रोजाना 33 यूनिट ब्लड खपता है। जो जरूरतमंदों की जान बचाने के काम आता है। लेकिन 33 में से करीब 5 यूनिट ब्लड रोजाना थैलीसीमिया के मरीजों को देना पड़ता है। अलवर में 100 से ज्यादा थैलीसीमिया के मरीज हैं। पूरे साल में करीब 12 हजार यूनिट ब्लड की जरूरत को पूरी करता है। इसके बावजूद भी ब्लड की कमी पड़ जाती है। ब्लड बैंक के प्रभारी डॉक्टर तरुण यादव ने बताया कि अलवर के तीनों राजकीय अस्पतालों में कुल 600 बेड हैं, जिनमें भर्ती मरीजों को नियमित रूप से ब्लड की जरूरत पड़ती है। 2022 के बाद से थैलेसीमिया मरीजों का इलाज भी अलवर में शुरू हो गया है। पहले ये मरीज जयपुर रेफर किए जाते थे, लेकिन अब अलवर में ही उनका उपचार संभव हो सका है। वर्तमान में करीब 100 से अधिक थैलेसीमिया मरीज हैं, जिन्हें हर महीने लगभग 150 यूनिट ब्लड उपलब्ध कराया जाता है। डॉ. यादव ने बताया कि जिला अस्पताल में कैंसर कीमो थैरेपी की सुविधा भी शुरू हो चुकी है, जिसके चलते ब्लड की मांग और अधिक बढ़ गई है। साथ ही डेंगू मरीजों के लिए एसडीपी (सिंगल डोनर प्लेटलेट्स) की विशेष व्यवस्था भी ब्लड बैंक द्वारा की गई है। रक्तदान शिविरों के जरिए 2200 यूनिट आ रहा ब्लड की पूर्ति के लिए सालभर में विभिन्न स्वैच्छिक रक्तदान शिविरों के माध्यम से करीब 2200 यूनिट ब्लड एकत्रित किया जाता है, जबकि शेष जरूरत रिप्लेसमेंट डोनेशन के जरिए पूरी की जाती है। एक ओर जहां अलवर में ही मरीजों को बेहतर स्वास्थ्य सुविधाओं का लाभ मिल रहा है, वहीं दूसरी ओर राजकीय ब्लड बैंक पर लगातार दबाव भी बढ़ता जा रहा है। डॉ. तरुण यादव ने आमजन से अपील की है कि गर्मी के मौसम में ब्लड की आवश्यकता ज्यादा होती है, लेकिन रक्तदान कम हो जाता है। ऐसे में ज्यादा से ज्यादा लोगों को आगे आकर स्वैच्छिक रक्तदान करना चाहिए, ताकि जरूरतमंद मरीजों की जान बचाई जा सके।

FacebookMastodonEmail

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *