अलार्मिंग स्थिति:सांस लेने तक के लिए अच्छी नहीं बची हमारे शहर की हवा, 2 साल में 260 ​दिन रहा प्रदूषण

आम आदमी की सांसों के लिए सबसे जरूरी हवा तक अब शहर में अच्छी नहीं बची है। साल के ज्यादातर दिन यह केवल संतोषजनक व खराब स्थिति में रहती है। यह बीच-बीच में अब खतरनाक तक होने लगी है, बीते दो साल में 260 दिन ऐसे रहे जब हवा में प्रदूषण का स्तर स्वास्थ्य के लिए हानिकारक स्थिति में पहुंचा। प्रदूषण विभाग द्वारा लगाए गए प्रदूषण मापक यंत्रों में दर्ज हो रही वायु गुणवत्ता अलार्मिंग स्थिति में पहुंच गई है। इन उपकरणों में सालभर दर्ज होने वाली वायु गुणवत्ता में अच्छी हवा के दिन कम व खराब हवा के दिन ज्यादा दर्ज हो रहे हैं। बीते साल यानी 2024 में 365 दिन में केवल 45 दिन ही हवा की गुणवत्ता अच्छी दर्ज हुई है। 2023 में अच्छी हवा के दिनों की संख्या 59 थी। यानी 2023 की अपेक्षा 2024 में अच्छी हवा वाले दिन कम हुए हैं। केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड ने देशभर में 237 शहरों में वायु की गुणवत्ता नापने के लिए उपकरण लगाए हैं। इनसे हर रोज वायु की गुणवत्ता नापी जा रही है। इसमें सागर शहर भी शामिल हैं। सागर में सिविल लाइन क्षेत्र व मकरोनिया के दीनदयाल नगर में वायु गुणवत्ता नापने के केंद्र हैं। इनमें 24 घंटे वायु की गुणवत्ता दर्ज हो रही है। इसे पांच श्रेणियों अच्छी, संतोषजनक, मध्यम, खराब, बहुत खराब में बांटकर हवा की स्थिति बताई जा रही है। बीते साल 2024 में अच्छी हवा के दिन 45, 2023 में 59 दिन थे बीते साल यानी 2024 में साल के 365 दिन में से केवल 45 दिन ही हवा की स्थिति अच्छी दर्ज हुई है। यानी इस हवा में कोई भी सांस ले सकता है। स्वस्थ आदमी से लेकर बीमार तक के लिए कोई खतरा नहीं है। साल के बाकी दिनों में 131 दिन स्थिति संतोषजनक रही। 108 दिन हवा खराब व अच्छी के बीच की स्थिति की रही। 28 दिन खराब व 5 दिन बहुत खराब भी रही। सालभर में 48 दिन की वायु की गुणवत्ता दर्ज नहीं हुई है। एक साल पहले 2023 में अच्छी हवा के दिन 59 : बीते साल की अपेक्षा एक साल पहले यानी 2023 में अच्छी हवा के दिन 59 दर्ज हुए थे। साथ ही संतोषजनक हवा के दिन भी ज्यादा 143 थे। अच्छी व खराब स्थिति के बीच की स्थिति के दिन 100 रहे। खराब हवा के दिन 17 थे। वायु गुणवत्ता बहुत खराब केवल 2 दिन दर्ज हुई थी। यानी इन दो दिनों की हवा में सांस लेने पर स्वस्थ आदमी को भी मुश्किल हो सकती है। बाकी 44 दिन वायु की गुणवत्ता दर्ज नहीं हुई है। (नोट-वायु गुणवत्ता की स्थिति सिविल लाइन केंद्र से ली गई।) वायु गुणवत्ता सूचकांक बताता है कि हवा अच्छी या खराब हवा की गुणवत्ता को उसमें मिलने वाली गैसों व कणों के आधार पर मापा जाता है। सरल शब्दों में कहें तो वायु में मौजूद हानिकारक प्रदूषकों जैसे कार्बन मोनोऑक्साइड, सल्फर ऑक्साइड, ओजोन, नाइट्रोजन डाइऑक्साइड और पार्टिकुलेट मैटर पीएम 2.5 और पीएम 10 कण प्रति मीटर क्षेत्र में देखा जाता है। वायु गुणवत्ता सूचकांक की गणना 0 से 500 के बीच होती है। सूचकांक में गणना जितनी ज़्यादा होगी, हवा उतनी ही ज्यादा प्रदूषित मानी जाती है। हवा की गुणवत्ता मापने के लिए तीन तरीकों का इस्तेमाल किया जाता है। इमसें वायु गुणवत्ता स्टेशन, उपग्रह प्रौद्योगिकी, डिजिटल कैमरा, सेंसर, इनडोर वायु गुणवत्ता मॉनिटर शामिल हैं। इनमें से शहर में वायु गुणवत्ता स्टेशन बनाए हैं। प्रदूषण का स्तर विश्व स्वास्थ्य संगठन द्वारा तय मानकों के आधार पर तय किया जाता है यानी तय मानकों से ज्यादा होने पर प्रदूषित माना जाता है। जितना ज्यादा होता जाता है प्रदूषण उतना ज्यादा होता है। तीन साल में हटा दिए गए 214 पेड़ वायु प्रदूषण कम करने या वायु की गुणवत्ता सुधारने में प्रमुख भूमिका पेड़ों की मानी जाती है यह हानिकारक तत्वों को सोखते हैं। धूल आदि के कणों को रोकते हैं। यही पेड़ शहर में लगातार कम हो रहे हैं। बीते तीन साल में नगर निगम अंतर्गत 214 पेड़ काटे या शिफ्ट किए गए हैं। यह जानकारी विधानसभा में दी गई है। विधानसभा में विधायक शैलेंद्र जैन ने पेड़ कटने पर चिंता जताते हुए प्रश्न लगाया था। इसके जवाब में बताया गया कि बीते तीन साल में शहर में 214 पेड़ काटने या शिफ्ट करने की अनुमति दी गई है। हालांकि इसमें यह नहीं बताया कि यह पेड़ कहां-कहां काटे गए हैं। शहर में ज्यादातर स्थानों पर पुराने व बड़े पेड़ थे। बस स्टैंड से लेकर एमएलबी स्कूल, तालाब के चारों ओर बड़े व पुराने पेड़ थे, इनकी संख्या लगातार कम हो रही है।

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