चित्तौड़गढ़ जिले के शंभूपुरा क्षेत्र में स्थित आदित्य अल्ट्राटेक सीमेंट फैक्ट्री के खिलाफ बड़ी संख्या में ग्रामीणों ने जिला कलेक्ट्रेट पहुंचकर जोरदार प्रदर्शन किया। इस प्रदर्शन में युवाओं के साथ महिलाएं भी शामिल रहीं। कलेक्ट्रेट कार्यालय के बाहर ग्रामीणों ने नारेबाजी करते हुए फैक्ट्री प्रबंधन पर स्थानीय लोगों की अनदेखी करने और क्षेत्र को नुकसान पहुंचाने के गंभीर आरोप लगाए। ग्रामीणों का कहना था कि फैक्ट्री से उन्हें किसी तरह का लाभ नहीं मिल रहा है, बल्कि उन्हें रोजाना परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। ब्लास्टिंग से घरों में दरारें, लोगों में डर ग्रामीणों ने बताया कि आदित्य अल्ट्राटेक सीमेंट फैक्ट्री के माइंस में लगातार हो रही ब्लास्टिंग के कारण आसपास के गांवों के घरों के दीवारों में दरारें पड़ती जा रही हैं। कई मकानों की दीवारें और छतें कमजोर हो चुकी हैं। लोगों का कहना है कि हर ब्लास्टिंग के समय उन्हें डर लगता है कि कहीं कोई बड़ा हादसा न हो जाए। बारिश के मौसम में इन दरारों के कारण पानी टपकता है, जिससे घरों में रहना मुश्किल हो जाता है। ग्रामीणों ने प्रशासन से मांग की कि ब्लास्टिंग से हुए नुकसान का सर्वे कराया जाए और जिन मकानों को नुकसान हुआ है, उनकी मरम्मत कराई जाए या उचित मुआवजा दिया जाए। स्थानीय युवाओं को रोजगार देने की मांग प्रदर्शन के दौरान रेल का अमराना ग्राम पंचायत के सामरी गांव निवासी शैतान सिंह रावत ने कहा कि फैक्ट्री प्रबंधन स्थानीय युवाओं को रोजगार नहीं दे रहा है। उनके अनुसार फैक्ट्री में बाहर से कर्मचारियों को लाया जा रहा है, जबकि आसपास के गांवों के युवा बेरोजगार हैं। उन्होंने मांग की कि फैक्ट्री में प्राथमिकता के आधार पर स्थानीय युवाओं को नौकरी दी जाए, ताकि उन्हें बाहर पलायन न करना पड़े और क्षेत्र का आर्थिक विकास हो सके। साथ ही उन्होंने घरों में आई दरारों की रिपेयरिंग कराने की भी मांग रखी। महिलाओं और बुजुर्गों की बढ़ती परेशानी प्रदर्शन में शामिल महिलाओं ने बताया कि लगातार हो रही ब्लास्टिंग से बच्चों और बुजुर्गों में डर का माहौल बना हुआ है। महिलाएं बोलीं कि रात के समय भी धमाकों की आवाज से लोग सहम जाते हैं। कभी कभी यह ब्लास्टिंग सुबह 5 बजे कर देते है। उन्होंने बताया कि रेल का अमराना निवासी रामी बाई, प्रेम बाई, पार्वती रावत, काजू कुमारी, यशवंत सिंह रावत, संजय सिंह रावत, देऊ बाई, रतन सिंह रावत और मनीषा रावत सहित कई लोगों के मकानों में बड़ी-बड़ी दरारें पड़ गई हैं। कई परिवारों को हर समय किसी अनहोनी का डर सता रहा है। पर्यावरण और स्वास्थ्य पर पड़ रहा असर ग्रामीणों ने कलेक्टर से मांग की है कि फैक्ट्री के कारण पर्यावरण पर भी बुरा असर पड़ रहा है। धूल-मिट्टी और प्रदूषण से लोगों के स्वास्थ्य पर नकारात्मक प्रभाव पड़ रहा है। सांस से जुड़ी बीमारियां बढ़ रही हैं और पशुओं की मौत के मामले भी सामने आ रहे हैं। ग्रामीणों ने मांग की कि प्रदूषण नियंत्रण के लिए प्रभावी कदम उठाए जाएं और फैक्ट्री प्रबंधन को नियमों का सख्ती से पालन करने के निर्देश दिए जाएं। सात दिन का समय, नहीं मानी बात तो आंदोलन तेज प्रदर्शनकारियों ने चेतावनी दी कि अगर उनकी मांगों पर जल्द कार्रवाई नहीं हुई तो आंदोलन को और तेज किया जाएगा। शैतान सिंह ने बताया कि जिला प्रशासन ने सात दिन का समय मांगा है और इस दौरान ग्रामीणों की फैक्ट्री मैनेजमेंट से बातचीत करवाई जाएगी। ग्रामीणों ने साफ कहा कि अगर फैक्ट्री प्रबंधन ने उनकी बात नहीं मानी तो फैक्ट्री के बाहर आंदोलन किया जाएगा और माइंस बंद कराने को लेकर भी बड़ा आंदोलन किया जाएगा।


