अशोकनगर में शुक्रवार को सवर्ण समाज ने प्रस्तावित यूजीसी रेग्यूलेशन 2026 के विरोध में जोरदार प्रदर्शन किया। प्रदर्शनकारियों ने आरोप लगाया कि यह नया नियम अनारक्षित वर्ग के छात्रों और शिक्षकों के अधिकारों, सम्मान और सुरक्षा की अनदेखी करता है, जो संविधान के मूल सिद्धांतों के विपरीत है। उन्होंने नियम को तत्काल वापस लेने की मांग की। शुक्रवार को सवर्ण समाज के छात्र, शिक्षक और अभिभावक शहर के गांधी पार्क में एकत्रित हुए। यहां से उन्होंने गांधी पार्क से स्टेशन रोड और फुट ओवरब्रिज होते हुए कलेक्ट्रेट कार्यालय तक रैली निकाली। रैली के दौरान यूजीसी नियम के विरोध में जमकर नारेबाजी की गई। कलेक्ट्रेट पहुंचने पर प्रदर्शनकारियों ने ज्ञापन सौंपने की मांग को लेकर काफी देर तक हंगामा किया। प्रदर्शन के दौरान सवर्ण समाज के प्रतिनिधियों ने कहा कि यूजीसी नियम 2026 में समानता की बात तो की गई है, लेकिन संविधान के अनुच्छेद 14 (कानून के समक्ष समानता), अनुच्छेद 15 (भेदभाव निषेध) और अनुच्छेद 21 (गरिमामय जीवन का अधिकार) के अनुरूप अनारक्षित वर्ग के अधिकारों का कोई स्पष्ट उल्लेख नहीं है। उन्होंने आरोप लगाया कि यह नियम अनारक्षित वर्ग को “संभावित अपराधी” और आरक्षित वर्ग को “स्वाभाविक पीड़ित” मानकर तैयार किया गया है। ब्लैकमेल की संभावनाएं बढ़ सकती हैं
ज्ञापन में यह भी कहा गया कि नए प्रावधानों से सवर्ण छात्रों और शिक्षकों में मानसिक दबाव और भय का माहौल बनेगा। किसी भी शैक्षणिक मतभेद, परीक्षा मूल्यांकन या अनुशासनात्मक कार्रवाई को जातीय उत्पीड़न का रूप देकर शिकायत में बदले जाने की आशंका जताई गई, जिससे झूठे आरोप, प्रतिशोध और ब्लैकमेल की संभावनाएं बढ़ सकती हैं। प्रदर्शनकारियों ने प्राकृतिक न्याय के सिद्धांतों निष्पक्ष जांच, निर्दोष माने जाने की धारणा और संतुलित सुनवाई की अनदेखी का आरोप भी लगाया। उनका कहना था कि इससे शिक्षण संस्थानों में सामाजिक सौहार्द प्रभावित होगा और वर्गीय ध्रुवीकरण बढ़ेगा। अंत में, सवर्ण समाज ने एसडीएम शुभ्रता त्रिपाठी को ज्ञापन सौंपते हुए यूजीसी नियम को पूर्णतः वापस लेने की मांग दोहराई।


