भास्कर न्यूज| महासमुंद गरबा आयोजन आज अश्लीलता का रूप लेते जा रहे हैं। अपनी बेटियों को ऐसे आयोजनों में जाने की अनुमति न दें। ऐसे आयोजनों का सामूहिक बहिष्कार करने के साथ इन पर सख्त प्रतिबंध लगाने की भी जरूरत है। बेमचा गांव के गुलाब बाड़ा में भागवत कथा कह रहे कथावाचक महाराज राजीवलोचन ने यह बातें कही। उन्होंने रासलीला पर होने वाले आक्षेपों का खंडन करते हुए कहा कि भगवान श्रीकृष्ण की रासलीला विशुद्ध प्रेम और भक्ति का संगम है। वृंदावन की गोपियां वास्तव में पूर्व जन्मों की महान संत और महात्मा थीं, जो प्रभु दर्शन से वंचित रह गई थीं। भगवान ने उनकी जन्मों की तृष्णा मिटाने उन्हें गोपी रूप में बुलाकर दिव्य आनंद प्रदान किया। यह मिलन शरीर का नहीं, बल्कि श्रद्धा और अटूट भक्ति का प्रतीक है। भगवताचार्य ने आज के दौर में आयोजित होने वाले गरबा और डांडिया कार्यक्रमों के गिरते स्वरूप पर गहरी चिंता व्यक्त की। उन्होंने कड़े शब्दों में कहा कि भक्ति के इन आयोजनों में अश्लीलता का प्रवेश हो गया है। स्वामी ने आगाह करते हुए कहा कि विधर्मी मानसिकता के लोग हमारी बेटियों को गुमराह कर उनका गलत फायदा उठा रहे हैं। भक्ति रस में डूबे श्रद्धालु कथा के दौरान स्वामी द्वारा प्रस्तुत किए गए भजनों पर माताएं, बहनें और उपस्थित श्रद्धालु भावविभोर होकर झूमने लगे। श्रीकृष्ण के बाल स्वरूप की झांकी और उनके मधुर प्रसंगों ने श्रोताओं को मंत्रमुग्ध कर दिया। अंत में भगवान की आरती कर क्षेत्र की सुख-समृद्धि मांगी।


