भास्कर न्यूज | बालोद शहर में आयोजित धर्मसभा में संत वैराग्य मुनि ने भगवान महावीर स्वामी के उपदेशों और उनके बताए मार्ग को आत्मसात करने का संदेश दिया। उन्होंने कहा कि हम भगवान महावीर स्वामी को तो मानते हैं, किंतु उनके मार्ग का पालन नहीं करते, जो हमारे लिए दुर्भाग्यपूर्ण है। संत वैराग्य मुनि ने कहा कि मनुष्य कई जन्मों से इंद्रियों में सुख खोजता रहा है और पदार्थों के प्रति आसक्ति बनाए हुए है, परंतु फिर भी सच्चे सुख की प्राप्ति नहीं कर सका। असली सुख अनासक्ति, त्याग, सरलता और कर्मों की निस्वार्थ भावना में है। उन्होंने कहा कि भगवान महावीर स्वामी ने अधिकार से अधिक कर्तव्यों का महत्व बताया है, क्योंकि धर्म की शुरुआत ही कर्तव्य से होती है। आज अधिकार को ज्यादा और कर्तव्य को कम महत्व देने के कारण परिवारों में प्रेम कम और तनाव ज्यादा दिखाई देता है। संत वैराग्य मुनि ने यह भी कहा कि राग-द्वेष आत्मकल्याण और धर्म में बाधक होते हैं, किंतु आज धर्म के नाम पर ही राग-द्वेष उत्पन्न हो रहे हैं। प्रतिकूल परिस्थितियों में भी जो समता का भाव रखते हैं, वे दुखी नहीं होते। संत वैराग्य मुनि ने साधर्मिक भक्ति को अत्यंत महत्वपूर्ण बताया।


