आंगनबाड़ी में पोषाहार योजना प्रभावित सेविका निजी खर्च से चला रही व्यवस्था

महेन्द्र साव धालभूमगढ़ और गुड़ाबांदा प्रखंड के 130 आंगनबाड़ी केंद्रों में बच्चों के पोषण और देखभाल की जिम्मेदारी निभाई जा रही है, लेकिन संसाधनों की कमी और प्रशासनिक उपेक्षा के चलते केंद्रों के संचालन में गंभीर समस्याएं सामने आ रही हैं। इनमें धालभूमगढ़ प्रखंड में 88 और गुड़ाबांदा में 42 केंद्र कार्यरत हैं, जिनकी निगरानी सीडीपीओ कार्यालय, धालभूमगढ़ द्वारा की जाती है। धालभूमगढ़ क्षेत्र के आंगनबाड़ी केंद्रों की जमीनी हकीकत चिंताजनक है। जहां पोषाहार के लिए सरकार से मिलने वाली राशि समय पर नहीं आ रही, वहीं सेविकाएं निजी खर्च से बच्चों को पोषण देने का प्रयास कर रही हैं। यदि शीघ्र आवश्यक कार्रवाई नहीं की गई, तो कुपोषण की समस्या और गहराने की आशंका है। प्रशासन को इस दिशा में तत्काल ध्यान देने की आवश्यकता है। ताकि कुपोषण पर जीत हासिल की जा सके। निरीक्षण में दिखी हकीकत शनिवार सुबह 10:30 बजे जूनबनी पंचायत के रघुनाथडीह गांव स्थित जयरामडीह टोला के आंगनबाड़ी केंद्र का हकीकत जानने भास्कर संवाददाता पहुंचा । इस दौरान सेविका साकरो मांडी उपस्थित थीं, जबकि सहायिका छुट्टी पर थीं। सेविका के अनुसार, केंद्र में कुल 15 बच्चे नामांकित हैं, जिनमें से शनिवार को केवल 6 ही बच्चे मौजूद थे। सेविका के अनुसार 10 बच्चे आए थे पर तीन-चार बच्चे छुट्टी से पहले घर चले गए थे। बिना अनुदान चल रहा केंद्र सेविका साकरो मांडी ने बताया कि जनवरी 2025 से पोषाहार की राशि नहीं मिली है। कई महीनों से राशि बकाया रहने के कारण भोजन की व्यवस्था करना मुश्किल हो गया है। स्थानीय दुकानदारों ने उधारी में अंडा, सब्जी और अन्य सामग्री देना बंद कर दिया है, जिससे उन्हें मजबूरी में अपने निजी खर्च से सामग्री खरीदनी पड़ रही है। क्या मिल रहा बच्चों को भोजन में सेविका ने जानकारी दी कि शनिवार को सुबह बच्चों को नाश्ते में सूजी का हलवा और अंडा दिया गया। दोपहर में खिचड़ी और फिर भात, दाल और सब्जी खिलाई गई। छुट्टी के समय भी बच्चों को खिचड़ी दी गई। पोषाहार वितरण नियमित हो रहा है, लेकिन वित्तीय सहयोग नहीं मिलने से यह व्यवस्था टिकाऊ नहीं रह पा रही है। इस केंद्र के पोषक क्षेत्र में कुल 86 घर हैं और कुल जनसंख्या 472 है। वर्ष 2025 में अब तक यहां से दो कुपोषित बच्चों को एमटीसी (मालन्यूट्रिशन ट्रीटमेंट सेंटर) रेफर किया जा चुका है, जो पोषण व्यवस्था पर सवाल खड़े करता है। सीडीपीओ माया कुमारी ने बताया कि आंगनबाड़ी केंद्रों में सुबह नाश्ते में सूजी का हलवा और अंडा, जबकि दोपहर व छुट्टी के समय खिचड़ी, भात, दाल और सब्जी दी जाती है। उन्होंने कुपोषित बच्चों की संख्या बताने से यह कहकर इंकार किया कि वह फिलहाल छुट्टी पर हैं और कार्यालय लौटने के बाद ही सटीक जानकारी दे सकेंगी।

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