भास्कर न्यूज | बालोद रायपुर आंदोलन में शामिल होने वाली जिले के ग्राम कुसुमकसा निवासी रसोइया रूखमणी सिन्हा की मौत राजनांदगांव के अस्पताल में हो गई। इस मामले में परिजनों का कहना है कि वह 20 से 23 जनवरी तक चार दिन रायपुर में आयोजित रसोइया संघ के आंदोलन में डटी रही। इस दौरान उनका स्वास्थ्य बिगड़ गया। 24 जनवरी को रायपुर से लौटी। इसके बाद उन्हें 108 एम्बुलेंस से जिला अस्पताल ले जाना पड़ा। मृतका के भतीजा देवेश सिन्हा ने बताया कि आंदोलन से लौटने के बाद उन्हें चक्कर और पेट फुला फुला सा लग रहा था। परिजनों के साथ उन्हें जिला अस्पताल बालोद ले गए। जहां 1 घंटे बाद रेफर कर दिया। स्थिति खराब होने पर आनन-फानन में राजनांदगांव मेडिकल कॉलेज ले गए। इलाज के दौरान 26 जनवरी को दोपहर 2 बजे उनकी मौत हो गई। वह कुसुमकसा के गर्ल्स हॉस्टल की रसोइया थी। 13 साल पहले चाचा प्रदीप सिन्हा का निधन हुआ था। गांव के जनप्रतिनिधियों ने सहानुभूति दिखाते हुए चाची को गर्ल्स हॉस्टल में रसोइया काम करने की जिम्मेदारी दी थी। तब से वहां काम कर रही थी।


